Secondary Memory क्या है? सेकेंडरी मेमोरी कितने प्रकार की होती है?

हेलो फ्रेंड्स आज के इस आर्टिकल में हम Secondary Memory के बारे में बात करने वाले है | 

आज हम विस्तार से जानेंगे कि सेकेंडरी मेमोरी क्या है? (What is Secondary Memory In Hindi) और सेकेंडरी मेमोरी कितने प्रकार के होते है? (Types of Secondary Memory In Hindi) |

इससे पिछले आर्टिकल में हमने जाना था कि प्राइमरी मेमोरी क्या है और कितने प्रकार के होते है? यदि आपने वो वाला आर्टिकल नहीं पढ़ा तो उसे एक बार जरूर पढ़ ले जिससे की आपका बेसिक क्लियर हो जाये और आपको ये वाला आर्टिकल भी अच्छे से समझ आये | 

उस आर्टिकल को आप यहाँ से पढ़ सकते है 👉 Primary Memory

दोस्तों जैसे की हम जानते हैं कि प्रोसेसर मेमोरी, जिसे प्राइमरी मेमोरी के रूप में भी जाना जाता है, की स्टोरेज क्षमता काफी कम तथा volatile होती है जिसमे स्टोर डेटा कंप्यूटर के बंद होते ही नष्ट हो जाती है | 

ऐसे में यदि हमें स्थायी रूप से बड़ी मात्रा में डेटा या प्रोग्राम को स्टोर करना है, तो हमें सेकेंडरी मेमोरी की जरूरत पड़ती है |

आइये विस्तार से जानते है कि सेकेंडरी मेमोरी क्या है? (What is Secondary Memory In Hindi)

Secondary Memory Kya Hai? (What is Secondary Memory in Hindi)
Secondary Memory Kya Hai? (What is Secondary Memory in Hindi)

Secondary Memory Kya Hai? (What is Secondary Memory in Hindi)

Secondary Memory, कंप्यूटर की Secondary Storage Device है जिसको कंप्यूटर में प्रोग्राम तथा प्रोग्राम के execution से प्राप्त आउटपुट को Permanent स्टोर करने के लिए किया जाता है | सेकेंडरी मेमोरी एक non-volatile मेमोरी है जिसमे स्टोर सभी डेटा और इनफार्मेशन कंप्यूटर के बंद होने के बाद भी कंप्यूटर में सेव रहता है | 

यह प्राइमरी मेमोरी की तरह CPU द्वारा सीधे एक्सेस नहीं होता | सेकेंडरी मेमोरी के डेटा को सबसे पहले रैम (रैंडम एक्सेस मेमोरी) or Primary Memory में लोड किया जाता है और फिर Primary Memory से प्रोसेसर (CPU) को डेटा पढ़ने और अपडेट करने के लिए भेजा जाता है | 

सेकंडरी मेमोरी एक Permanent Storage Memory है जो प्राइमरी मेमोरी की तुलना में काफी स्लो और सस्ती होती है | 

सेकेंडरी मेमोरी को External memory or Auxiliary storage के रूप में भी जाना जाता है जिसके अंदर gigabytes और terabytes में डाटा स्टोर किया जा सकता है। 

इसे Backup Storage या Mass Storage Media भी कहा जाता है।

सेकेंडरी मेमोरी के उदाहरण  – Magnetic Tape, Hard Disc, Compact Disc, Pen Drive, Flash Drive, SSDs, Optical (CD or DVD) drives आदि |


सेकेंडरी मेमोरी के प्रकार (Types of Secondary Memory in Hindi)

Secondary Memory सीपीयू का हिस्सा है या नहीं, इसके आधार पर सेकेंडरी मेमोरी दो प्रकार के होते हैं –

  1. Fixed Storage Device 
  2. Removable Storage Device 

Fixed Storage Device 

फिक्स्ड स्टोरेज मीडिया हार्ड डिस्क की तरह एक इंटरनल स्टोरेज मीडिया है जो कंप्यूटर के अंदर fixed होता है | 

फिक्स्ड स्टोरेज एक Internal media device है जिन्हें Fixed Disks drives या Hard Drives के रूप में जाना जाता है।

Fixed Storage Device वास्तव में पूरी तरह fixed नहीं होती, इन्हें सिस्टम की repairing, maintenance और अपग्रेड आदि के लिए हटाया जा सकता है।

मगर इसे बिना toolkit के खोला नहीं जा सकता है और यदि इसे अपग्रेड करने या किसी और कार्य के लिए खोलने की जरुरत पड़ती है तो यह कार्य एक इंजीनियर द्वारा किया जाता है |

Types of fixed storage:

  • Internal flash memory (rare)
  • SSD (solid-state disk) units
  • Hard disk drives (HDD)

Removable Storage Device

ऐसे स्टोरेज डिवाइस जो कंप्यूटर के बाहर होते है तथा जिनको कंप्यूटर के साथ कभी भी कनेक्ट करके, कभी भी कंप्यूटर से रिमूव किया जा सकता है, Removable Secondary Storage device कहलाते है |

रिमूवेबल स्टोरेज एक external media device है इन्हें Removable Disks drives  या External Drives के रूप में जाना जाता है।

Removable Storage Device ऐसे स्टोरेज डिवाइस है जिन्हे सिस्टम के चलने के दौरान ही कंप्यूटर सिस्टम से हटाया जा सकता है।

Removable devices के उदाहरणों में CDs, DVDs,और Blu-Ray disk drives, के साथ ही डिस्केट और USB drives शामिल हैं।

Removable स्टोरेज डिवाइस user के लिए डेटा को एक कंप्यूटर सिस्टम से दूसरे में डेटा स्थानांतरित करना आसान बनाते है।

Types of Removable Storage:

  • Optical discs (CDs, DVDs, Blu-ray discs)
  • Memory cards
  • Floppy disks
  • Magnetic tapes
  • Disk packs
  • Paper storage (punched tapes , punched cards)

आइए अब हम कुछ Popular सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस के बारे में जानते है | 

विभिन्न प्रकार के सेकंडरी स्टोरेज डिवाइस (Different Types of Secondary Storage In Hindi)

  1. Hard Disk 
  2. Solid-state Drive
  3. Pen Drive
  4. Blu Ray Disk
  5. SD Card
  6. CD Drive
  7. DVD Drive

Hard Disk

यह एक कठोर Magnetic Disc है जिसका उपयोग डेटा और प्रोग्राम को स्टोर करने के लिए किया जाता है। यह डेटा को स्थायी रूप से कंप्यूटर में स्टोर करता है और एक ड्राइव यूनिट के भीतर स्थित होता है।

Hard Disk को Hard Drive के रूप में भी जाना जाता है। 

यह एक non-volatile storage device है। जिसमे एक या एक से अधिक प्लेटर्स होते हैं जो एयर-सील आवरण में पैक होते हैं। 

हार्ड डिस्क गोलाकार डिस्क की एक श्रृंखला से बना है, जिसे platters कहा जाता है, जो एक स्पिंडल के चारों ओर लगभग  ½ इंच से अधिक व्यवस्थित होता है।

हार्ड डिस्क एल्यूमीनियम मिश्र धातु जैसे non-magnetic material से बने होते हैं और 10-20 nm चुंबकीय सामग्री के साथ लेपित होते हैं।

इन डिस्क का Standard diameter 14 इंच है | 

magnetic coating को magnetizing या demagnetizing करके डेटा स्टोर किया जाता है। 

कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव पर संग्रहीत डेटा में आम तौर पर ऑपरेटिंग सिस्टम, इंस्टॉल किए गए सॉफ़्टवेयर और user की फाइलें और प्रोग्राम्स शामिल होते हैं, जिसमें चित्र, संगीत, वीडियो, पाठ दस्तावेज़ आदि होते हैं।

एक Magnetic Reader ARM का उपयोग डेटा को पढ़ने और डिस्क पर डेटा लिखने के लिए किया जाता है। एक सामान्य आधुनिक HDD में terabytes (TB) की क्षमता होती है।

Components of Hard Disk

हार्ड ड्राइव के मुख्य components में एक हेड एक्ट्यूएटर, रीड / राइट एक्ट्यूएटर आर्म, रीड / राइट हेड, प्लेटर और स्पिंडल शामिल हैं। 

एक सर्किट बोर्ड, जिसे disk controller या  interface board कहा जाता है, हार्ड ड्राइव के पीछे मौजूद होता है। यह हार्ड ड्राइव को कंप्यूटर के साथ communicate करने की अनुमति देता है।

Solid-state Drive

SSD (Solid State Drive) भी HDD की तरह ही एक non-volatile storage डिवाइस है जिसका उपयोग कंप्यूटर में डेटा और इनफार्मेशन को स्टोर करने के लिए किया जाता है | SSD (Solid State Drive) के अंदर कोई मूविंग पार्ट्स नहीं होते जैसे की हार्ड डिस्क में होते थे | 

SSD (Solid State Drive) में मूविंग पार्ट्स न होने के कारण इससे डेटा को आसानी से एक्सेस किया जा सकता है, जिससे पावर और समय की भी बचत होती है | 

SSD (Solid State Drive) की बात करे तो यह HDD से थोड़ा महंगा होता है मगर जैसे-जैसे SSD की लागत कम हुई है, यह डेस्कटॉप और लैपटॉप कंप्यूटरों में हार्ड डिस्क की जगह उपयोग किया जाने लगा है ।

यह नोटबुक, लैपटॉप के लिए उपयुक्त है, जिनमे बहुत ज्यादा स्टोरेज की आवश्यकता नहीं होती।

Pen Drive

Pen drive एक पोर्टेबल सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस है जिसे USB flash drive, thumb drive और jump drive के रूप में भी जाना जाता है | 

Pen drive को usb पोर्ट के माध्यम से कंप्यूटर के साथ कनेक्ट किया जाता है | इसका उपयोग computers के बीच डेटा ट्रांसफर के लिए किया जाता है | 

Pen drive में किसी भी प्रकार के मूवेबल पार्ट नहीं होता इसमें एक integrated circuit की बनी एक चिप होती है जो डेटा को स्टोर करके रखता है | यह Chip एक Plastic या Aluminium casing के अंदर रखी जाती है। 

पेन ड्राइव की डेटा स्टोरेज क्षमता आम तौर पर 2 जीबी से 128 जीबी तक होती है। इसके अलावा, यह एक plug and play device डिवाइस है क्योंकि इसे इस्तेमाल करने के लिए आपको कोई अलग से ड्राइव, सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर की जरूरत नहीं है।

Blu Ray Disk

ब्लू रे डिस्क (BD) एक optical storage मीडिया है जिसका उपयोग high definition (HD) वीडियो और अन्य मल्टीमीडिया फाइल को स्टोर करने के लिए किया जाता है। 

CD/ DVD की तुलना में BD (Blu Ray Disk) कम तरंग दैर्ध्य लेजर का उपयोग करता है। BDs 128GB डेटा तक स्टोर कर सकता है।

SD Card

SD Card जिसे Secure Digital Card के नाम से जाना जाता है एक पोर्टेबल स्टोरेज डिवाइस है जो ज्यादातर स्मार्टफोन और डिजिटल कैमरा में उपयोग किया जाता है | 

आप जब चाहे इसे अपने स्मार्टफोन से हटा सकते है और कंप्यूटर से कनेक्ट करके इसके अंदर स्टोर Data को भी कार्ड रीडर की मदद से देख सकते है | 

SD Card में हार्ड डिस्क की तरह कोई मूविंग पार्ट नहीं होता | इसके अंदर कई सारे चिप होते है जो डेटा को स्टोर करने का कार्य करते है | 

मार्किट में कई सारे SD Card मौजूद है जिनकी स्टोरेज क्षमता अलग अलग होती है जैसे – standard SD cards, mini SD cards, and micro SD cards. | 

CD Drive

CD (Compact Disk) एक पोर्टेबल सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस है। जो गोलाकार होता है |  यह पॉली कार्बोनेट प्लास्टिक से बना है।

सीडी की अवधारणा को 1982 में फिलिप्स और सोनी द्वारा साथ में मिलकर विकसित किया गया था।

Germany में फिलिप्स की workshop में पहली CD (Compact Disk) 17 अगस्त 1982 को बनाई गई थी।

शुरुआत में, इसका उपयोग साउंड रिकॉर्डिंग को स्टोर करने और चलाने के लिए किया गया था, बाद में इसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाने लगा जैसे कि Documents, Audio Files, वीडियो, और सॉफ्टवेयर प्रोग्राम जैसे अन्य डेटा को सीडी में स्टोर करने के लिए।

DVD Drive

DVD का फुल फॉर्म होता है Digital Video Display | यह एक प्रकार का ऑप्टिकल मीडिया है जो ऑप्टिकल डेटा को स्टोर करने के लिए उपयोग किया जाता है।

हालांकि इसका आकार CD के समान होता है, लेकिन इसकी स्टोरेज क्षमता CD की तुलना में काफी ज्यादा होता है। इसलिए, यह मूवीज को स्टोर करने और देखने के लिए तथा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम को बांटने के लिए ज्यादातर उपयोग किया जाता है | 

DVD को 1995 में सोनी, पैनासोनिक, फिलिप्स और तोशिबा द्वारा मिलकर develop किया गया था।


सेकेंडरी मेमोरी की विशेषताएं (Characteristics of Secondary Memory)

  1. सेकेंडरी मेमोरी को एक Backup Memory के रूप में भी जाना जाता है।
  2. यह एक non-volatile मेमोरी है।
  3. सेकेंडरी मेमोरी में डेटा स्थायी रूप से संग्रहित रहता है। 
  4. इसका उपयोग कंप्यूटर में डेटा और प्रोग्राम्स को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
  5. कंप्यूटर बिना सेकेंडरी मेमोरी के भी चल सकता है।
  6. सेकेंडरी मेमोरी , प्राइमरी मेमोरी से स्लो होती है | 
  7. यह प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सस्ती होती है | 
  8. इसमें डेटा संग्रहीत करने के लिए ऑप्टिकल और चुंबकीय मेमोरी होती हैं।
  9. यह एक external मेमोरी है |

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निष्कर्ष

दोस्तों आशा करता हु कि आज के इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको सेकेंडरी मेमोरी क्या होती है? ( What is Secondary Memory In Hindi ) और सेकेंडरी मेमोरी कितने प्रकार की होती है? (Types of Secondary Memory In Hindi ) से संबंधित सभी जानकारी मिल गई होगी और आपको और कही इसके बारे में सर्च करना नहीं पड़ेगा |

अगर आप कंप्यूटर फंडामेंटल Complete Tutorial चाहते है तो मेरे इस आर्टिकल Computer Fundamental Tutorial In Hindi को देखे | यहाँ आपको कंप्यूटर फंडामेंटल्स के सभी टॉपिक्स step by step मिल जाएगी |

दोस्तों आशा करता हु कि आपको ये पोस्ट पसंद आई होगी और आपको Secondary Memory Kya Hai ? के बारे में काफी जानकरी हुई होगी |

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अगर आपको अभी भी Secondary Memory In Hindi or Auxiliary Memory in Hindi से संबंधित कोई भी प्रश्न या Doubt है तो आप जरूर बताये मैं आपके सभी सवालों का जवाब दूँगा और ज्यादा जानकारी के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते है |

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Jeetu Sahu is A Web Developer | Computer Engineer | Passionate about Coding, Competitive Programming and Blogging

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