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Cryptography क्या है? (What is Cryptography In Hindi)

आज पूरी दुनिया इंटरनेट से जुड़ी हुई है, इंटरनेट एक खुला तंत्र है जहाँ कोई भी डेटा का आदान प्रदान कर सकता है। मगर कुछ डेटा या इनफार्मेशन ऐसी भी होती है, जिन्हे आप इंटरनेट की इस दुनिया से गोपनीय रखना चाहते है। आप नहीं चाहते कि ये डेटा बिना आपके अनुमति के कोई रीड कर सके। 

मगर इंटरनेट चूँकि एक खुला तंत्र है इसलिए कोई भी आपके डेटा को एक्सेस कर सकता है ऐसे में आपकी गोपनीयता ख़तम हो सकती है। तो यहाँ ऐसे कंडीशन में डेटा की गोपनीयता बरक़रार रखने के लिए ही क्रिप्टोग्राफ़ी तकनीक का उपयोग किया जाता है।  

बड़ी बड़ी कम्पनिया, बैंक्स आपके इम्पोर्टेन्ट डेटा को सिक्योर रखने के लिए क्रिप्टोग्राफी तकनीक का उपयोग करती है। लगभग 90% इंटरनेट वेबसाइटें अपने संवेदनशील डेटा को संभालने के लिए किसी न किसी प्रकार की क्रिप्टोग्राफी तकनीक का उपयोग करती है। 

मगर ये क्रिप्टोग्राफ़ी क्या है? (What is Cryptography In Hindi) कैसे ये हमारे डेटा को सिक्योर रखते है? और ये कितने प्रकार के होते है? आदि कुछ सवाल है जिसके बारे में हम आज के इस आर्टिकल में बात करने वाले है।

तो आइये अब बिना समय गवाए जानते है कि Cryptography Kya Hai ?

cryptography

क्रिप्टोग्राफ़ी क्या है? (What is Cryptography In Hindi)

क्रिप्टोग्राफ़ी एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिये हम plain text को cipher text में कन्वर्ट करते है और cipher text को दुबारा plain text में कन्वर्ट करते है।  

यहाँ plain text एक नार्मल मैसेज है जिसको कोई भी रीड कर सकता है और समझ सकता है कि उस मैसेज में क्या लिखा है, लेकिन cipher text एक सीक्रेट मैसेज होता है जिसको कोई भी रीड तो कर सकता है मगर उसको समझ नहीं सकता कि उसमे लिखे मैसेज का क्या मतलब है। 

इस मैसेज को केवल वही व्यक्ति समझ सकता है जिसके पास ये भेजा जा रहा होता है। क्योकि इसके पास एक key होता है जिसके द्दारा वह उस cipher text को पुनः plain text में कन्वर्ट कर सकता है।  

आइये इस बात को हम एक उदाहरण से समझते है। 

मान लीजिये आप कोई मैसेज plain text में इंटरनेट के माध्यम से आपने किसी दोस्त को भेज रहे है। और चूँकि इंटरनेट एक खुला तंत्र है जिसको कोई भी एक्सेस कर सकते है तो आपके द्दारा भेजा गया मैसेज आपके दोस्त तक सुरक्षित रूप से पहुंचे ऐसा कोई जरुरी नहीं। 

ऐसा भी हो सकता है कि कोई हैकर आपके द्दारा भेजे गए मैसेज को मॉडिफाई करदे या फिर बिना आपके परमिशन के उसको एक्सेस कर ले और उसको रीड कर ले और यदि ऐसा होता है तो इससे आपकी प्राइवेसी खतरे में आ सकती है।

तो क्रिप्टोग्राफ़ी इन्ही सब कंडीशन में डेटा की गोपनीयता को बनाये रखने के लिए उपयोग होता है। क्रिप्टोग्राफ़ी हमारे मैसेज को, जो की पहले plain text था को cipher text (secret message) में कन्वर्ट कर देता है। इससे यदि कोई हैकर उस डेटा को चुरा भी ले तो उसको पढ़ नहीं सकता और डेटा सुरक्षित रूप से मंजिल तक जाता है।  

क्रिप्टोग्राफ़ी का उपयोग डेटा की confidentiality के लिए किया जाता है। confidentiality का मतलब है यदि आपके द्दारा भेजा गया डेटा केवल उसी के द्दारा readable हो जिसके पास यह भेजा जा रहा है तो हम कहेंगे कि डेटा की गोपनीयता बरक़रार है। 

आज कल आपने इंटरनेट में हो रहे विभिन्न घटनाओ के बारे में तो सुना ही होगा, जिसमे कुछ असामाजिक तत्व या हैकर लोगो के पर्सनल जानकारी बिना उनकी मर्जी के एक्सेस कर ले रहे है और उनका गलत उपयोग कर रहे है। तो ऐसे में डेटा की गोपनीयता बरक़रार रखने के लिए ही क्रिप्टोग्राफ़ी तकनीक का उपयोग किया जाता है। 

क्रिप्टोग्राफी की परिभाषा (Meaning of Cryptography In Hindi)

Meaning/Definition – क्रिप्टोग्राफी कंप्यूटर विज्ञान में, mathematical concepts और विभिन्न नियम-आधारित गणनाओं का उपयोग करके दो पक्षों के बीच एक सुरक्षित communication करने का एक तरीका है, जिसे एल्गोरिदम कहा जाता है। ये एल्गोरिदम plain text, इनफार्मेशन और मैसेजेस को cipher text में बदल देते हैं जिसे डिकोड करना मुश्किल होता है।  

इन एल्गोरिदम का उपयोग क्रिप्टोग्राफिक कुंजी जनरेशन, डिजिटल हस्ताक्षर, डेटा गोपनीयता वेरिफिकेशन,इंटरनेट पर वेब ब्राउज़िंग और क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड लेनदेन जैसे गोपनीय लेनदेन की सुरक्षा के लिए किया जाता है।

 “crypt” का अर्थ है “hidden” या “छुपा हुवा” और graphy का अर्थ है “writing” है।

क्रिप्टोग्राफी secure communication के लिए एक विधि प्रदान करती है। यह unauthorized पार्टियों (जिन्हें आमतौर पर हैकर्स के रूप में जाना जाता है) को गुप्त संदेशों तक पहुंच प्राप्त करने से रोकता है। 

क्रिप्टोग्राफी द्वारा प्रदान की जाने वाली विधि को Encryption कहा जाता है। एन्क्रिप्शन, plain text को एक cipher text में बदल देता है। cipher text को plain text में बदलने की प्रक्रिया को Decryption के रूप में जाना जाता है।

डेटा और जानकारी को सुरक्षित और गोपनीयता बनाए रखने के लिए Encryption अनिवार्य रूप से महत्वपूर्ण है यह न केवल डेटा के अनधिकृत पहुंच से बचता है बल्कि user authentication के लिए भी उपयोग किया जाता है।

एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम plaintext लेते हैं, और इसे ciphertext में परिवर्तित करते हैं, जो समझने योग्य रूप में नहीं होता। इसे केवल वे लोग ही पढ़ और प्रोसेस कर सकते है जिनके लिए यह भेजा जा रहा है। एक key होता है जो उपयोगकर्ता को संदेश को पुनः डिक्रिप्ट करने की अनुमति प्रदान करता है। 

हम क्रिप्टोग्राफी का उपयोग क्यों करते हैं? (Why do we use cryptography)

संगठन आमतौर पर क्रिप्टोग्राफी का उपयोग निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए  करते हैं:

  • Reliability
  • Confidentiality
  • Non-repudiation
  • Authenticity

Basic Terminologies In Cryptography 

Plain text -: plain text किसी भी भाषा में लिखा गया एक नार्मल मैसेज है जिसे आप आपने दोस्त को या रिसीवर को भेजना चाहते है। For example – चैटिंग करते समय दोस्तों को भेजा गया मैसेज जैसे -: “Good morning” या “Good evening” मैसेज एक plain text है जिसको कोई भी रीड कर सकता है। 

Cipher text -: plain text में एन्क्रिप्शन एल्गोरिथ्म लगाने के बाद जो मैसेज प्राप्त होता है उसे ciphertext कहते है। ये binary कोड में भी हो सकता है और ये encryption करने के बाद उत्पन होते है। जैसे : “111011000101”  या “@#$%786$%*^8590”.

Ciphertext एक सीक्रेट मैसेज है जिसको कोई भी आसानी से नहीं समझ सकता। इसको समझने के लिए सबसे पहले सामने वाले को इसे decrypt करना पड़ता है। 

Encryption -: Encryption एक ऐसी विधि है जिसका उपयोग plaintext को विभिन्न एन्क्रिप्शन एल्गोरिथ्म का उपयोग करते हुए ciphertext में कन्वर्ट करने के लिए किया जाता है।   

Decryption -: Decryption एक ऐसी विधि है जिसका उपयोग plaintext को पुनः ciphertext में कन्वर्ट करने के लिए किया जाता है। ciphertext को Decrypt किये बिना पढ़ना काफी मुश्किल होता है या यूँ कहे ही बिना Decrypt किये ciphertext को पढ़ा नहीं जा सकता। ciphertext को Decrypt करने के लिए एक key का उपयोग किया जाता है।  

Key -: यह एक संख्या (या संख्याओं का एक सेट) है जिसका उपयोग encryption और decryption के समय किया जाता है। 

किसी संदेश को encrypt करने के लिए, हमें एक encryption algorithm, एक encryption key और plaintext की आवश्यकता होती है। encryption के बाद जो ciphertext बनते हैं उनको डिक्रिप्ट करने के लिए, हमें एक decryption algorithm, एक decryption key की आवश्यकता होती है। तो encryption और decryption में key एक अहम् भूमिका निभाता है।  

Cryptography: इसमें एक सुरक्षित क्रिप्टोसिस्टम बनाने का अध्ययन किया जाता है। 

Cryptanalysis : इसमें क्रिप्टो सिस्टम को तोड़ने का अध्ययन किया जाता है। 

Cryptology: क्रिप्टोग्राफी और क्रिप्टैनालिसिस दोनों का अध्ययन Cryptology में किया जाता है 

क्रिप्टोग्राफी के प्रकार (Types of Cryptography In Hindi)

Cryptography मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है -: 

  1. Symmetric Key Cryptography (Secret Key Cryptography)
  2. Asymmetric Key Cryptography (Public Key Cryptography)
  3. Hash Functions

1) Symmetric Key Cryptography (Secret Key Cryptography)

Symmetric Key Cryptography को Private या Secret key cryptography भी कहा जाता है।  यह सबसे सरल प्रकार का क्रिप्टोग्राफ़ी है जिसमे एक ही key का उपयोग encryption और decryption के समय किया जाता है। 

जिस key का उपयोग encryption और decryption के लिए किया जाता है वह key सेन्डर और रिसीवर दोनों के पास shared होती है। जिसका मतलब है कि sender इसी key का उपयोग करके मैसेज को encrypt करेगा और receiver भी इसी key का उपयोग करके मैसेज को decrypt करेगा। 

आइये इसको हम एक उदाहरण से समझते है। 

मान लीजिये रमेश (sender), श्यामू (receiver) को मैसेज भेज रहा है और वह नहीं चाहता कि उनका मैसेज कोई और देखे, इसलिए वह अपने मैसेज को एक shared key (जिसके बारे में केवल रमेश (sender) और श्यामू (receiver) दोनों को ही पता है) के द्दारा एन्क्रिप्ट करता है और उसे  श्यामू (receiver) के पास भेज देता है। जब  श्यामू को एन्क्रिप्टेड मैसेज प्राप्त होता है, तो वह उसे shared key से डिक्रिप्ट करता है इस तरह से मैसेज की गोपनीयता बरक़रार रहती है।  

Symmetric Key Cryptography तेज और सरल है लेकिन इसमें key को शेयर करना मुश्किल है क्योकि इसमें सेन्डर और रिसीवर को key (जिससे मैसेज encrypt हुवा है) को, सिक्योर तरीके से आदान-प्रदान करना पड़ता है। यदि इस key के बारे में हैकर को पता चल गया तो वह पुरे मैसेज को decrypt कर सकता है। इसलिए key का सिक्योर तरीके से शेयर करना आवश्यक है। 

DES (Data Encryption System) सबसे लोकप्रिय symmetric key cryptography सिस्टम है।

Symmetric key cryptography के कुछ प्रकार हैं -:

  • Block
  • Block cipher
  • DES (Data Encryption System)
  • RC2
  • IDEA
  • Blowfish
  • Stream cipher

2) Asymmetric Key Cryptography (Public Key Cryptography)

Asymmetric Key Cryptography को Public  Key Cryptography भी कहा जाता है। इसमें दो अलग key यूज़ होती है एक private key और दूसरा public key | एक key का उपयोग मैसेज को एन्क्रिप्ट करने के लिए किया जाता है और दूसरे key का उपयोग मैसेज को डिक्रिप्ट करने के लिए किया जाता है। 

प्रत्येक व्यक्ति के पास एक private key और एक public key होता है, private key केवल उस व्यक्ति के पास  secretly स्टोर्ड होता है इसके बारे में किसी और को पता नहीं होता और public key पूरे नेटवर्क में shared होता है। 

Private key से एन्क्रिप्ट मैसेज public key से डेक्रिप्ट नहीं होता यह केवल private key से decrypt होता है मगर public key द्दारा एन्क्रिप्ट मैसेज केवल private key से ही डेक्रिप्ट होता है। 

यदि किसी को मैसेज भेजना होता है तो उस मैसेज को उसके public key से एन्क्रिप्ट करके भेजा जाता है। और फिर वह व्यक्ति (reciver) अपने  private key से मैसेज को डिक्रिप्ट कर लेता है। 

आइये इसको भी एक उदाहरण से समझते है। 

मान लीजिये राम , राजू को कोई मैसेज भेजना चाहता है, और इसके लिए वह मैसेज को एन्क्रिप्ट करके भेजता है।  राम मैसेज को एन्क्रिप्ट करने के लिए राजू के public key का उपयोग करता है। और जैसे की हमे पता है, public key से एन्क्रिप्ट मैसेज केवल उसके private key से डिक्रिप्ट होगा इसलिए राजू , राम के द्दारा भेजे गए एन्क्रिप्टेड मैसेज अपने private key से डिक्रिप्ट कर लेता है। इस तरह से मैसेज की गोपनीयता बरकरार रहती है । 

ये क्रिप्टोग्राफ़ी Symmetric key cryptography की तुलना में भले ही थोड़ी slow काम करती है मगर Symmetric key cryptography के मुकाबले बहुत ज्यादा secure है।  

Asymmetric key cryptography के कुछ प्रकार हैं:

  • RSA
  • DSA
  • PKC
  • Elliptical Curve Technique

3) Hash Functions

हैश फंक्शन एक ऐसा फंक्शन है जो हैशिंग करके हमारे सेंसिटिव इनफार्मेशन को सर्वर में सुरक्षित रखता है। हैश फंक्शन आपके द्दारा एंटर किये गए plain text को किसी और स्ट्रिंग मैं बदल देता है। ये स्ट्रिंग फिक्स्ड होती है। मतलब जितने करैक्टर का आपका plain text होगा उतने ही करैक्टर का आउटपुट ये हैश फंक्शन generate करके देगा। 

For Example – मान लीजिये आप इंस्टाग्राम में अपना username और पासवर्ड एंटर करके लॉगिन कर रहे है।  यदि यह इनफार्मेशन बिना हैश फंक्शन उपयोग किये डेटाबेस में स्टोर किया जायेगा तो कोई भी आपके द्दारा दर्ज डेटा को पढ़ लेगा।  ऐसे में डेटा की सिक्योरिटी के लिए हैश फंक्शन का उपयोग पॉसवर्ड जैसे इम्पोर्टेन्ट डेटा एंटर करते समय किया जाता है।  

जैसे ही आप अपना पासवर्ड एंटर करेंगे ये आपके पासवर्ड को एक फिक्स्ड स्ट्रिंग में कन्वर्ट करके डेटाबेस में स्टोर कर लेगा। और जब आप फिर से उस पासवर्ड को दर्ज करके लॉगिन करने का प्रयास करेंगे तो यह डेटाबेस में मौजूद उस फिक्स्ड स्ट्रिंग और आपके पासवर्ड एंटर करने के बाद generate हैश स्ट्रिंग की तुलना करेगा और फिर यदि दोनों हैश एक जैसे निकलते है तो यह आपको उस एप्लीकेशन में लॉगिन करने देगा।  

इस प्रकार की क्रिप्टोग्राफी में इनफार्मेशन के हस्तांतरण के दौरान किसी भी कुंजी का उपयोग नहीं किया जाता है। हैश फ़ंक्शन अपरिवर्तनीय हैं। इसमें plain text के आधार पर एक निश्चित लंबाई का हैश मान उपयोग किया जाता है जिससे प्लेनटेक्स्ट की सामग्री को पुनर्प्राप्त करना असंभव हो जाता है।

हैशिंग किसी दिए गए स्ट्रिंग को एक निश्चित लंबाई वाली स्ट्रिंग में बदलने का एक तरीका है। 

एक अच्छा हैशिंग एल्गोरिदम दिए गए प्रत्येक इनपुट के लिए unique आउटपुट उत्पन्न करता है। हैश को क्रैक करने का एकमात्र तरीका हर संभव इनपुट करना, जब तक कि आपको ठीक वही हैश न मिल जाए।

आमतौर पर passwords को एन्क्रिप्ट करने के लिए कई ऑपरेटिंग सिस्टम हैश फ़ंक्शन का उपयोग करते हैं। 

कुछ सबसे प्रसिद्ध हैशिंग एल्गोरिदम हैं:

  • MD5
  • SHA-1
  • SHA-2 family (जिसमें SHA-224, SHA-256, SHA-384, और SHA-512 शामिल हैं)
  • SHA-3
  • Whirlpool
  • Blake 2
  • Blake 3

हमें क्रिप्टोग्राफी की आवश्यकता क्यों है? (Why do we need cryptography)

मान लीजिए कि मोहन नाम का एक व्यक्ति है जो अपने दोस्त राहुल को एक संदेश भेजना चाहता है और वे चाहते हैं कि उनका यह मैसेज प्राइवेट हो और किसी और की इस मैसेज तक पहुंच न हो। 

वह इस संदेश को भेजने के लिए एक सार्वजनिक मंच, उदाहरण के लिए, व्हाट्सएप का उपयोग करता है। इनका मुख्य लक्ष्य इस कम्युनिकेशन को सुरक्षित तरीके से करना है। मोहन राहुल के पास नेटवर्क पर एक संदेश भेजता है “क्रिप्टोग्राफी क्या है?”

मान लीजिए कि सैम नाम का एक चतुर व्यक्ति या हैकर है जिसने गुप्त रूप से इनके संचार चैनल तक पहुंच प्राप्त कर ली है। चूंकि इस व्यक्ति के पास उनके बिच हो रहे कम्युनिकेशन तक पहुंच है, इसलिए वह केवल सुनने के अलावा और भी बहुत कुछ कर सकता है, उदाहरण के लिए, वह संदेश को बदल भी सकता है। 

अब, यह सिर्फ एक छोटा सा उदाहरण है। क्या होगा यदि सैम को आपकी निजी जानकारी तक पहुँच प्राप्त हो? यदि ऐसा होता है तो यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यहीं से एन्क्रिप्शन या क्रिप्टोग्राफी आती है।

क्रिप्टोग्राफ़ी के जरिये मैसेज को secrete तरीके से भेजा जाता है इससे यदि हैकर उस मैसेज को चुरा भी लेता है तो वह नहीं समझ सकता है कि उस मैसेज का क्या मतलब है ? इससे आपका डेटा पूरी तरह सिक्योर हो जाता हो। 

क्रिप्टोग्राफी का इतिहास (History of cryptography In Hindi)

cryptography” शब्द, ग्रीक शब्द “kryptos” से लिया गया है, जिसका अर्थ है “hidden” या “छिपा हुआ”।

क्रिप्टोग्राफी की उत्पत्ति लगभग 2000 ईसा पूर्व से है। क्रिप्टोग्राफ़ी का उपयोग प्राचीन कल से चला आ रहा है।  प्राचीन कल में ऐसे कई साबुत मिलते है जिनमे क्रिप्टोग्राफ़ी जैसी encryption तकनीक का उपयोग किया गया है। 

Modern cryptography और प्राचीन क्रिप्टोग्राफ़ी में ज्यादा कोई फर्क नहीं है दोनों में ही मैसेज को encryption द्दारा गुप्त रखा जाता है। 

आधुनिक cipher का पहला ज्ञात उपयोग Julius Caesar (100 ईसा पूर्व से 44 ईसा पूर्व) द्वारा किया गया था, जो अपने राज्यपालों और अधिकारियों के साथ संवाद करते समय अपने दूतों पर भरोसा नहीं करते थे। इस कारण से, उन्होंने एक प्रणाली बनाई जिसमें उनके संदेशों के प्रत्येक वर्ण को रोमन वर्णमाला में उससे तीन स्थान आगे एक वर्ण से बदल दिया जाता था।

हांलाकि आधुनिक क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम की तुलना में Caesar Ciphers को सुलझाना बहुत आसान था। लेकिन आज के एल्गोरिदम और क्रिप्टोसिस्टम बहुत अधिक उन्नत हैं। वे डेटा के सबसे सुरक्षित पारगमन और भंडारण को सुनिश्चित करने के लिए संदेशों के cipher text को एन्क्रिप्ट करने के लिए कई राउंड ciphers का उपयोग करते हैं। जिससे डेटा बहुत अधिक सिक्योर हो जाता है। 

क्रिप्टोग्राफी के शुरुआती दिनों में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश सिफर और एल्गोरिदम को डिक्रिप्ट कर दिया गया, जिससे वे अब डेटा सुरक्षा के लिए बेकार हो गए हैं। लेकिन आज के एल्गोरिदम को समझा जा सकता है, मगर केवल एक संदेश के अर्थ को समझने के लिए वर्षों और कभी-कभी दशकों तक का समय लग सकता है । इस प्रकार, और अधिक नई उन्नत क्रिप्टोग्राफी तकनीकों को बनाने की दौड़ जारी है। अधिक उन्नत क्रिप्टोग्राफी विधियों का कारण, डेटा को अधिक से अधिक सुरक्षित रूप से संरक्षित करने की आवश्यकता है। 

क्रिप्टोग्राफी की विशेषताएं (Features of Cryptography In Hindi)

क्रिप्टोग्राफी की विशेषताएं निम्नलिखित है -:

  • Confidentiality
  • Non-repudiation
  • Integrity
  • Authenticity

1) Confidentiality :

इसके अंतर्गत यह सुनिश्चित किया जाता है कि sender द्वारा जो मैसेज भेजा जा रहा है उस मैसेज को केवल reciver द्वारा ही डिक्रिप्ट किया जा सके और उस मैसेज के इनफार्मेशन को पढ़ सके।

2) Non-repudiation : 

इसका मतलब कि सेन्डर ने रिसीवर को जो मैसेज भेजा है उससे वह भविस्य में पीछे नहीं हट सकता और न ही जिस कारण से मैसेज भेजा है उससे मुकर सकता है।

3) Integrity :

इसके अंतर्गत, जो भी मैसेज या इनफार्मेशन भेजी गयी है उसे वह भेजने के बाद और ना ही भेजने के दौरान modify कर सकता है। 

4) Authenticity :

इसके अंतर्गत सेन्डर (मैसेज भेजने वाला) और रिसीवर (मैसेज रिसीवर करने वाला) आपस में identities और मैसेज कहा पहुंचेगा verify कर सकते है। 

Bitcoin, cryptocurrency और अन्य ब्लॉकचेन क्रिप्टोग्राफी का उपयोग कैसे करते हैं? 

चूँकि Bitcoin और अन्य cryptocurrency कार्य करने के लिए क्रिप्टोग्राफिक तकनीक पर निर्भर हैं, इसलिए इनके नाम में “क्रिप्टो” शब्द का उपयोग किया गया है। बिटकॉइन दो प्राथमिक क्रिप्टोग्राफिक विधियों का उपयोग करता है। पहला asymmetric encryption और दूसरा hashing है। 

एक बिटकॉइन वॉलेट, private keys का एक कलेक्शन है जिसका उपयोग नेटवर्क पर लेनदेन पर sign करने के लिए किया जाता है। 

बिटकॉइन और अन्य ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजीज cryptographic signatures का उपयोग करती हैं, यह गारंटी देने के लिए कि जब आप अपने मित्र को बिटकॉइन भेजते हैं, तो वास्तव में यह आप ही थे जिसने इसे भेजा था। यह asymmetric encryption का एक रूप है। 

Blockchain में एक नया ब्लॉक जोड़ने के लिए बहुत अधिक काम करना पड़ता है, जो इसे और अधिक सुरक्षित बनाना है। यदि आप बिटकॉइन के काम करने के तरीके के बारे में अधिक गहराई से पढ़ने में रुचि रखते हैं, तो आप इसे bitcoin.org पर पढ़ सकते हैं।

Conclusion

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमनें Cryptography के बारे में बात की और जाना कि क्रिप्टोग्राफ़ी क्या है? (What is Cryptography In Hindi) कैसे ये हमारे डेटा को सिक्योर रखते है? और ये कितने प्रकार के होते है? (Types of Cryptography In Hindi)

तो दोस्तों अगर आपको ये पोस्ट पसंद आया है तो इस पोस्ट को अपने अपने दोस्तों को शेयर करना न भूलिएगा ताकि उनको भी Cryptography Kya Hai और क्रिप्टोग्राफ़ी कितने प्रकार के होते है? के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके।

अगर आपको अभी भी Cryptography In Hindi से संबंधित कोई भी प्रश्न या Doubt है तो आप हमने कमेंट्स के जरिए अपने सवाल पुछ सकते है। मैं आपके सभी सवालों का जवाब दूँगा और ज्यादा जानकारी के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते है |

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