HTTP क्या है? – What is HTTP In Hindi

जब आप किसी वेब ब्राउज़र के एड्रेस बार को देखते हैं, तो आपको एक URL दिखाई देता है, जो http:// या https:// से शुरू होता है। 

http:// और https://, दोनों नेटवर्क प्रोटोकॉल हैं जिनका उपयोग वेब सर्वर और ब्राउज़र के बीच किसी वेबसाइट के डेटा का आदान-प्रदान करने के लिए किया जाता है। 

आज के इस आर्टिकल में हम HTTP प्रोटोकॉल के बारे में बात करने वाले है। 

आज हम विस्तार से जानेगे कि HTTP Kya Hai? HTTP का इतिहास क्या है? इसकी विशेषताएं क्या है? और HTTP के क्या फायदे व क्या नुकशान है? (Advantages and Disadvantages of HTTP In Hindi)

यदि आपको HTTPS प्रोटोकॉल के बारे में भी जानना है तो आप इसके लिए हमारे निचे दिए लिंक पर क्लिक करके HTTPS प्रोटोकॉल के बारे में विस्तार से पढ़ सकते है। 

खैर अभी के लिए हम इस आर्टिकल में HTTP प्रोटोकॉल के बारे में बात करेंगे। तो चलिए अब बिना समय गवाए जान लेते है कि HTTP क्या है? (What is HTTP In Hindi)

HTTP क्या है? - What is HTTP In Hindi

HTTP क्या है? (What is HTTP In Hindi)

HTTP का मतलब हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल है जिसका आविष्कार Tim Berners-Lee और उसकी टीम ने 1989 से 1991 के बीच किया था। हाइपरटेक्स्ट एक प्रकार का टेक्स्ट है जिसे विशेष रूप से हाइपरटेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज (HTML) की मदद से कोडित किया जाता है। 

HTTP/3 , HTTP प्रोटोकॉल का नवीनतम संस्करण है, जिसे मई 2022 में प्रकाशित किया गया था। 

इस प्रोटोकॉल को, इसकी दक्षता के कारण हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल के रूप में जाना जाता है। यह कंप्यूटर को एक दूसरे के साथ संचार करने के लिए एक standardized तरीका प्रदान करता है। 

HTTP नियमों और मानकों का एक सेट प्रदान करता है जो नियंत्रित करता है कि वर्ल्ड वाइड वेब पर कोई भी जानकारी कैसे स्थानांतरित हो सकती है। यह एक क्लाइंट-सर्वर प्रोटोकॉल है जो वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर को संचार करने में सक्षम बनाता है। 

HTTP की परिभाषा क्या है? – Definition of HTTP In Hindi

HTTP का फुल फॉर्म HyperText Transfer Protocol है। जिसका उपयोग वर्ल्ड वाइड वेब पर डेटा (जैसे  HTML फ़ाइलें, इमेज फ़ाइलें, प्लेन टेक्स्ट, हाइपरटेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो, आदि) वितरित करने के लिए किया जाता है।

HTTP नियमों और मानकों का सेट प्रदान करता है जो यह नियंत्रित करता है कि वर्ल्ड वाइड वेब पर किसी भी जानकारी को कैसे प्रसारित किया जा सकता है। HTTP वेब ब्राउज़र और सर्वर को संचार करने के लिए स्टैण्डर्ड नियम प्रदान करता है।

HTTP एक एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल है जो TCP पर आधारित होता है। इसे “स्टेटलेस प्रोटोकॉल” के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि प्रत्येक कमांड को अलग से निष्पादित किया जाता है।

HTTP,  FTP के समान है क्योंकि यह फ़ाइलों को एक होस्ट से दूसरे होस्ट में स्थानांतरित करता है। 

यह TCP/IP पर आधारित संचार प्रोटोकॉल है, जो हमें सर्वर से क्लाइंट को डेटा स्थानांतरित करने की अनुमति प्रदान करता है।

HTTP का इतिहास क्या है? – History of HTTP In Hindi

टिम बर्नर्स ली और उनकी टीम ने CERN में HTTP आविष्कार किया था। HTTP मे  समय समय पर होने वाले विकाश के फलस्वरूप नए नए version बनते गए जो की निम्नलिखित है -:

HTTP 0.9 -: यह HTTP का पहला version था जिसे 1991 में पेश किया गया था।

HTTP  1.0 -: 1996 में, RFC  (Request For Comments) 1945 को HTTP 1.0 पेश किया गया।

HTTP 1.1 -: जनवरी 1997 में, RFC 2068 को HTTP 1.1 में पेश किया गया।

HTTP 2.0 -: HTTP 2.0, 14 मई 2015 को RFC 7540 के रूप में प्रकाशित हुआ।

HTTP 3.0 -: HTTP 3.0 पिछले RFC ड्राफ्ट पर आधारित है। इसका नाम बदलकर HTTP QUIC कर दिया गया है जो कि Google द्वारा विकसित एक ट्रांसपोर्ट लेयर नेटवर्क प्रोटोकॉल है।

Http Error Code क्या होता है?

जब हम इंटरनेट द्वारा ब्राउज़र मे कुछ सर्च करते है तो ब्राउज़र मे कभी कभी error दिखाई देता है, जिसके कारण वेबसाइट open नहीं होता है. Http मे इन errors के लिए कई codes है जिससे error के पीछे का कारण पता चलता है।

Http के कुछ common error codes की जानकारी निम्न है -:

1) 401 Unauthorised 

यह सबसे common वेबसाइट error है। 401 error message का मतलब है, कि सर्वर को unauthenticated यानी गलत request मिल रहा है। इस तरह के error अक्सर सही URL address न होने पर दिखता है।

2) 404 Not Found

यह भी काफी कॉमन HTTP error code है। ये http error तब आता है जब यूजर ऐसी चीजों की तलाश करता है, जो सर्वर में उपलब्ध नहीं है।

3) 500 Internal Server Error

500 Internal Server Error एक सामान्य error है, जो सर्वर मे गड़बड़ी के कारण दिखाई देता है। चूंकि यह एक generic error है, तो error आने के कई कारण हो सकते है, जैसे WordPress plugin, Database, इत्यादि।

4) 408 Request Timeout

यह error तब आता है जब सर्वर का speed slow होता है या आपके द्वारा रिक्वेस्ट की गई file size बड़ा है।

5) 400 Bad File Request

अक्सर, यह error ब्राउज़र में ग़लत URL address टाइप करने के कारण आता है।

6) 403 Forbidden/ Access Denied

यह error आपको तभी दिखता है जब आप ऐसे पेज को ओपन करने की कोशिश करते है जिसका permission आपके पास नहीं है।

7) 503 Service Unavailable Unavailable

इस error का कारण इंटरनेट कनेक्शन मे कोई दिक्कत या server busy हो सकता है।

HTTP कैसे कार्य करता है? (How Does HTTP Work In Hindi)

Http एक application layer protocol है, जो Transmission Control Protocol (TCP) पर आधारित है . 

यह client – server कम्युनिकेशन मॉडल का इस्तेमाल करता है. यह एक stateless प्रोटोकॉल है, जिसका मतलब है कि client जितने भी request भेजता है उन सभी को automatically अलग-अलग execute करता है और सभी requests को response करने के बाद कनेक्शन बंद कर देता है।   

Client द्वारा भेजे गए message को request कहा जाता है और सर्वर से जो मैसेज उत्तर के रूप में message प्राप्त होता है उसे response कहते है। 

इन सर्वर में सभी प्रकार के फाइल फॉर्मेट जैसे फोटो, वीडियो, ऑडियो, इत्यादि स्टोर रहता है. जब client से server को request मिलता है, तो सर्वर इसके अनुसार response करता है और डाटा भेजता है।

वेब ब्राउज़र और सर्वर के बिच एक दूसरे के साथ डाटा communication करने के लिए Http द्वारा कुछ standard rules निर्धारित किए गए है,

जब क्लाइंट सर्वर पर http request भेजता है, तो वेब सर्वर इसे प्राप्त करता है. इसके बाद सर्वर उस रिक्वेस्ट को प्रोसेस करने के लिए application run करता है और फिर सर्वर request के अनुसार response करता है और डाटा Client को भेज देता है। 

आइए इसको हम एक उदाहरण के द्वारा अच्छे से समझने का प्रयास करते है

सबसे पहले हम जब भी कोई वेबसाइट खोलना चाहते हैं तो सबसे पहले हम वेब ब्राउजर खोलते हैं उसके बाद हम उस वेबसाइट का यूआरएल टाइप करते है जिसे हमे खोलना है (जैसे www.facebook.com)। 

यह यूआरएल अब Domain Name Server (DNS) को भेज दिया जाता है। फिर DNS पहले अपने डेटाबेस में इस यूआरएल के रिकॉर्ड की जांच करता है, फिर DNS इस यूआरएल के अनुरूप वेब ब्राउजर को उसका आईपी एड्रेस लौटाता है। 

आईपी एड्रेस प्राप्त होने के बाद अब ब्राउज़र वास्तविक सर्वर को अनुरोध भेजता है। ब्राउज़र द्वारा सर्वर से अनुरोध प्राप्त  होने के बाद सर्वर उस अनुरोध के अनुसार क्लाइंट को डेटा भेज देता है, 

क्लाइंट को डेटा भेजने के बाद कनेक्शन बंद हो जाएगा। अगर हम सर्वर से कुछ और चाहते हैं तो हमें क्लाइंट और सर्वर के बीच कनेक्शन फिर से स्थापित करना पड़ता है। तो दोस्तों HTTP प्रोटोकॉल कुछ इस तरह कार्य करता है। 

How Does HTTP Work

क्या HTTP का इस्तेमाल सुरक्षित है?

Http अधिक secure नहीं है जिसका सबसे बड़ा कारण SSL certificate का न होना है. जो connection को secure बनाने में मदद करता है. बिना SSL certificate के client और server के बीच secure connection नहीं बनता है और न ही ट्रांसफर होने वाला डाटा encrypted होता है. इसमें डाटा हैक होनी की संभावना भी अधिक रहता है.

इन्ही कारणों की वजह से Http ज्यादा सुरक्षित नहीं होता है. Http connection मे कभी भी Credit card, Banking, पासवर्ड, इत्यादि की जानकारी साझा करने से बचना चाहिए 

Note -: जब आप किसी वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करते हैं या अपने क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन भुगतान करते हैं तो आपको इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आप जिस वेबसाइट पर जा रहे हैं उसका URL आपके ब्राउज़र के एड्रेस बार में HTTPS से शुरू होता है या नहीं?  यूआरएल में HTTPS का होना काफी महत्वपूर्ण है क्योकि यह  प्रोटोकॉल आपकी डेटा को सुरक्षा सुनिचित करता है। 

HTTP की विशेषताएं क्या है? – Features of HTTP In Hindi

  • HTTP,  TCP/IP आधारित संचार प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग सर्वर से क्लाइंट और क्लाइंट से सर्वर के बिच डेटा पहुंचाने के लिए किया जाता है।
  • सर्वर और क्लाइंट के बिच किसी भी प्रकार की सामग्री का आदान-प्रदान तब तक किया जा सकता है जब तक सर्वर और क्लाइंट कनेक्टेड है।
  • एक बार डेटा का आदान-प्रदान हो जाने के बाद सर्वर और क्लाइंट एक दूसरे से जुड़े नहीं रहते।
  • Connectionless protocol -: HTTP एक Connectionless protocol है। क्योंकि कनेक्शन बंद होने के बाद सर्वर को क्लाइंट के बारे में कुछ भी याद नहीं रहता है और क्लाइंट को सर्वर के बारे में कुछ भी याद नहीं रहता।
  • HTTP क्लाइंट एक request सर्वर को भेजता है और सर्वर से प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करता है। जब सर्वर request प्राप्त करता है, तो सर्वर request को प्रोसेस  करता है और HTTP क्लाइंट को प्रतिक्रिया वापस भेजता है जिसके बाद क्लाइंट कनेक्शन काट देता है। कनेक्शन बंद होने के बाद सर्वर को क्लाइंट के बारे में कुछ भी याद नहीं रहता है और क्लाइंट को सर्वर के बारे में कुछ भी याद नहीं रहता।
  • Media independent -: HTTP प्रोटोकॉल एक Media independent प्रोटोकॉल है क्योंकि डेटा तब तक भेजा जा सकता है जब तक क्लाइंट और सर्वर दोनों डेटा सामग्री को संभालना जानते हैं। क्लाइंट और सर्वर दोनों के लिए MIME-type हेडर में सामग्री का प्रकार बताना आवश्यक होता है।
  • Stateless -: HTTP एक स्टेटलेस प्रोटोकॉल है क्योंकि सर्वर और क्लाइंट एक दूसरे के बारे में केवल वर्तमान अनुरोध के दौरान ही अवगत होते हैं। बाद में दोनों एक दूसरे को भूल जाते हैं। प्रोटोकॉल की इस प्रकृति के कारण, न तो क्लाइंट और न ही ब्राउज़र वेब पेजों पर विभिन्न अनुरोधों के बीच जानकारी को याद रख सकता है।

HTTP के फायदे क्या है? – Advantages of HTTP In Hindi

  • एक साथ कम कनेक्शन होने के कारण मेमोरी और सीपीयू का उपयोग कम होता है।
  • चूंकि कनेक्शन के प्रारंभिक चरण में कनेक्शन स्थापित करने से हैंडशेकिंग किया जाता है, इसलिए आगे देरी कम होती है क्योंकि बाद के अनुरोधों के लिए हैंडशेकिंग की कोई आवश्यकता नहीं होती।
  • कनेक्शन बंद किए बिना error का पता चल जाता है।
  • हम HTTP को अन्य प्रोटोकॉल के साथ, या अन्य नेटवर्क के साथ भी HTTP को implement कर सकते हैं।
  • HTTP आधारित वेबपेज, कंप्यूटर और इंटरनेट कैश में स्टोर होते हैं, जिस कारन ये आसानी से पहुंच योग्य होते है।
  • HTTP प्लेटफ़ॉर्म इंडिपेंडेंट प्रोटोकॉल है।
  • HTTP को runtime-support. की आवश्यकता होती।

HTTP के नुकसान क्या है? – Disadvantages of HTTP In Hindi

  • communication स्थापित करने और डेटा स्थानांतरित करने के लिए HTTP को  अधिक power की आवश्यकता होती है।
  • HTTP कम सुरक्षित है, क्योंकि यह किसी भी एन्क्रिप्शन विधि का उपयोग नहीं करता। 
  • कोई गोपनीयता नहीं है क्योंकि कोई भी मैसेज या कंटेंट को देख सकता है और उसमे मॉडिफाई भी कर सकता है। 
  • क्लाइंट तब तक कनेक्शन बंद नहीं करता है जब तक कि उसे सर्वर से पूरा डेटा प्राप्त नहीं हो जाता, और इसलिए सर्वर को डेटा पूरा होने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है और इस समय के दौरान सर्वर अन्य क्लाइंट के लिए उपलब्ध नहीं हो सकता।

HTTP और HTTPS मे क्या अंतर है? (Difference Between HTTP and HTTPS In Hindi)

दोस्तों यदि आपको HTTP और HTTPS मे क्या अंतर है? ये जानना है तो आप इसके बारे में निचे दिए गए लिंक पर लीक करके इसके बारे में विस्तार से पढ़ सकते है।

निष्कर्ष

दोस्तों आज के इस आर्टिल्स में हमने HTTP के बारे में बात की और जाना कि HTTP क्या है? (What is HTTP In Hindi) HTTP का इतिहास क्या है? और HTTP का उपयोग क्या है?

तो दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा और यदि ये आर्टिकल आपको पसंद आया है तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों को शेयर करना न भूलिएगा ताकि उनको भी HTTP Kya Hai के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके .

अगर आपको अभी भी HTTP In Hindi से संबंधित कोई भी प्रश्न या Doubt है तो आप कमेंट्स के जरिए हमसे पुछ सकते है। मैं आपके सभी सवालों का जवाब दूँगा और ज्यादा जानकारी के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते है |

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Jeetu Sahu is A Web Developer | Computer Engineer | Passionate about Coding, Competitive Programming and Blogging

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