Assembler, Compiler और Interpreter क्या है? [Full Information – हिंदी में]

हेलो दोस्तों…. आज के इस पोस्ट में मैं आपको असेम्बलर क्या होता है?…. (What is Assembler in Hindi), कम्पाइलर क्या होता हैं?… (What is Compiler in Hindi) और इंटरप्रेटर क्या होता है?…(What is interpreter in Hindi) के बारे में बताने वाला हूँ |

मगर Assembler, Compiler और Interpreter जैसे लैंग्वेज ट्रांसलेटर सॉफ्टवेयर के बारे में बताने से पहले मैं आपको ये बताने वाला हूँ कि हम इन लैंग्वेज ट्रांसलेटर सॉफ्टवेयर का उपयोग क्यों करते हैं? 

साथ ही मैं आपको बताने वाला हूँ कि सोर्स कोड (source code) क्या होता है और मशीन कोड क्या होता है, ताकि आपको Assembler ,Compiler और Interpreter के बारे में अच्छे से समझ आ सके और आपको कही और इसके बारे में सर्च करना न पड़े |

इस पोस्ट के आखिर में मैं आपको असेम्बलर और कम्पाइलर के बिच क्या अंतर है?…(Difference Between Assembler And Compiler In Hindi) असेम्बलर और इंटरप्रेटर के बिच क्या अंतर है?… (Difference Between Assembler And Interpreter In Hindi) तथा कम्पाइलर और इंटरप्रेटर के बिच क्या अंतर है?… (Difference Between Compiler and Interpreter In Hindi) ये सभी चीजे भी बताने वाला हूँ |

तो ध्यान से पूरा पढियेगा जिससे की आपको सभी चीजे बड़े अच्छे से समझ आये | तो चलिए सभी चीजे एक एक करके जानते हैं | 

Table of Contents

Assembler, Compiler और Interpreter का इस्तेमाल क्यों किया जाता हैं ?

आम-तौर पर हम मोबाइल गेम्स, ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर आदि बनाने के लिए मशीन लैंग्वेज ,असेंबली लैंग्वेज और या फिर हाई लेवल लैंग्वेज का उपयोग कर सकते हैं |

इनमे से मशीन लैंग्वेज कंप्यूटर के समझने के लिए काफी आसान होता है पर एक प्रोग्रामर के लिए कंप्यूटर प्रोग्राम सीधे मशीन लैंग्वेज में लिखना एक थकाऊ काम है इसलिए डेवेलपर्स ने Assembler Language बनाया | 

Assembler Language मशीन डिपेंडेंट लैंग्वेज हैं इस लैंग्वेज में mnemonics (इंग्लिश जैसे सिंबॉलिक कोड्स (ADD, PRINT, MOV, SUB आदि ) का उपयोग किया जाता हैं इसलिए असेंबली लैंग्वेज प्रोग्रामर्स के समझने के हिसाब से थोड़ा आसान और मशीन के समझने के हिसाब से थोड़ा मुश्किल था | 

फिर डेवेलपर्स ने हाई लेवल लैंग्वेज को डेवलप्ड किया जो प्रोग्रामर्स के लिए बहुत ही आसान था इसलिए प्रोग्राम ज्यादातर उच्च-स्तरीय भाषाओं जैसे Java, C++, Python आदि में लिखे जाते हैं | 

हाई लेवल लैंग्वेज प्रोग्रामर फ्रेंडली और Machine independent होता हैं जिसकी वजह से हाई लेवल लैंग्वेज काफी पोर्टेबल है | हाई लेवल लैंग्वेज में जो कोड या प्रोग्राम लिखे जाते है इन्हें ही सोर्स कोड (source code) कहा जाता है। 

चुकी कंप्यूटर सिर्फ मशीन लैंग्वेज ( 0’s और 1’s ) की भाषा, जिसे मशीन कोड कहते हैं, को ही समझता है इसलिए कंप्यूटर को हमारे High Level Language में लिखे गए प्रोग्राम समझ नहीं आते | ऐसे में हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम को मशीन कोड (0’s और 1’s) में कन्वर्ट करना पड़ता है | 

High Level Language में लिखे गए प्रोग्राम को मशीन कोड ( 0’s और 1’s ) में कन्वर्ट करने के लिए Assembler, Compiler और Interpreter जैसे लैंग्वेज ट्रांसलेटर सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता हैं | जो उच्च-स्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को मशीन कोड (0’s और 1’s) में कन्वर्ट कर देता हैं | 

यहाँ तक आपको समझ आ गया होगा कि हम Assembler ,Compiler और Interpreter जैसे लैंग्वेज प्रोसेसर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल क्यों किया जाता हैं ? 

आइये अब हम जान लेते है कि Assembler Kya Hai?, Compiler Kya Hai? और Interpreter Kya Hota Hai? और ये कैसे काम करते हैं ? तो चलिए जानते हैं | 

Assembler Kya Hai? | What is Assembler in Hindi

Assembler का उपयोग Assembly Language में लिखे गए Programs को Machine Language में कन्वर्ट करने के लिए किया जाता हैं | Assembler सोर्स कोड को इनपुट के रूप में लेता है जो की Assembly Language में लिखा होता है जिसको Assembler, मशीन की समझने वाली भाषा निम्न-स्तरीय भाषा या Machine Language में बदल देता है |

GAS, GNU आदि असेम्बलर के कुछ उदहारण है |

असेम्बलर की मुख्य विशेषताएं (Key Features of Assembler in Hindi)

  1. Assembler सोर्स कोड जो की Assembly Language में होता है को मशीन कोड में कन्वर्ट करता है फिर जाकर, ये मशीन कोड कंप्यूटर में execute होता है | 
  1. Assembler सोर्स कोड को पहले ऑब्जेक्ट में कनवर्ट करता है फिर यह ऑब्जेक्ट कोड को लिंकर प्रोग्राम के साथ Machine Language में कनवर्ट करता है।
  1. Assembler के आउटपुट में re-locatable मशीन कोड होता है जो एक असेम्बलर द्वारा जेनरेट किया जाता है जो बाइनरी कोड द्वारा represent किया जाता है।
  1. असेंबलर Assembly Language में लिखे गए कोड को इनपुट के रूप लेता है |  
  1. Assembler असेंबली लैंग्वेज को मशीन लैंग्वेज में परिवर्तित कर देता है |
  1. असेंबलर एक बार में पूरे कोड को मशीन लैंग्वेज में नहीं बदलता |
  1. असेंबलर कम्पाइलर की तुलना में कम intelligent होता है।
  1. असेंबलर दिए गए इनपुट के दो phase बनाता है first phase और second phase |
  1. Assembler में debugging करना मुश्किल होता है।
  1. GAS, GNU असेंबलर के उदाहरण है।

Compiler Kya Hai? | What is Compiler in Hindi

Compiler एक लैंग्वेज ट्रांसलेटर सॉफ्टवेयर हैं जो उच्च-स्तरीय भाषा (High-level language) जैसे कि C, C++, C#, Java आदि में लिखे गए प्रोग्राम को पढ़ता हैं और उसे मशीन कोड या निम्न-स्तरीय भाषा में कन्वर्ट कर देता हैं |

आसान शब्दो में कहे तो Compiler एक ऐसे सॉफ्टवेयर हैं जो हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम जिसे सोर्स कोड (source code) कहा जाता है, को मशीन या कंप्यूटर के समझने वाली भाषा मशीन कोड ( 0’s  और 1’s ) या निम्न-स्तरीय भाषा में बदल देता हैं | 

Compiler सोर्स कोड को मशीन कोड में तब कन्वर्ट करता है जब Source Code में कोई त्रुटि न हो | अगर Source Code में कोई त्रुटि हुवा तो कम्पाइलर उस त्रुटि को दूर किये बिना सोर्स कोड को मशीन कोड में कन्वर्ट नहीं करेगा |

Compiler असेम्बलर की तुलना में कही ज्यादा इंटेलीगेंट होता हैं क्योकि यह सभी प्रकार की limits, ranges, errors आदि की जांच करता है।

मगर Compiler जब रन होता है तब यह मेमोरी का बड़ा हिस्सा उपयोग करता हैं और कम्पाइलर काफी स्लो काम करता है क्योकि ये पहले पुरे प्रोग्राम को चेक करता है फिर प्रोग्राम में कोई error न होने पर उसे मशीन कोड ( 0’s  और 1’s ) या निम्न-स्तरीय भाषा में ट्रांसलेट करता हैं |

उदाहरण – C, C++, Java Compilers |

कम्पाइलर की मुख्य विशेषताएं (Key Features of Compiler In Hindi)

  1. Compiler हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है तब जाकर वो प्रोग्राम कम्प्यूटर में रन होता है | 
  1. Compiler प्रोग्राम को मशीन कोड में ट्रांसलेट करने से पहले पुरे प्रोग्राम को स्कैन करता है और कोई error न होने पर ही उस प्रोग्राम को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है | 
  1. Compiler पुरे सोर्स कोड को इनपुट के रूप ले लेता है | 
  1. Compiler के केस में ऑब्जेक्ट कोड generate होता है | 
  1. कम्पाइलर execution में इंटरप्रेटर की तुलना में काफी कम समय लेता है | 
  1. Compiler के माध्यम से निम्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखे गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट किया जाता है -: C, COBOL, C#, C++, आदि | 
  1.  Compiler को Interpreter की तुलना में काफी ज्यादा मेमोरी की जरुरत होती है | 
  1. अगर प्रोग्राम में कोई मॉडिफिकेशन होता है तो पुरे प्रोग्राम को फिर से compile करना पड़ता है | 
  1.  कम्पाइलर Interpreter की तुलना में काफी फ़ास्ट होता है | 
  1. प्रोग्राम को कम्पाइल करने के बाद उसे बार बार कम्पाइल करने की जरुरत नहीं होती | 
  1. अगर प्रोग्राम में कोई error होता है तो Compiler प्रोग्राम को कम्पाइल करने के बाद error की लिस्ट प्रदान कर देता है | 
  1. Compiler प्रोग्राम में पाए गए error को दूर करने के बाद ही उस प्रोग्राम को मशीन कोड में कन्वर्ट करता है | 
  1. Compiler में debugging करना थोड़ा slow होता है क्योंकि कम्पाइलर पहले पुरे प्रोग्राम को कम्पाइल करता है फिर कोई eoor होने पर उसे डिस्प्ले करता है | 

Interpreter Kya Hai? | What is Interpreter in Hindi

ऐसा ट्रांसलेटर जो High Level Language में लिखे गए प्रोग्राम के पुरे स्टेटमेंट को एक साथ ट्रांसलेट न करके उसके एक-एक लाइन को ट्रांसलेट और रन करता है इसे ही इंटरप्रेटर (Interpreter) कहते हैं |

Interpreter पुरे प्रोग्राम को एक साथ मशीन कोड में कन्वर्ट नहीं करता ये पहले प्रोग्राम के एक लाइन को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करेगा और उसे रन या एक्सेक्यूट करेगा | फिर प्रोग्राम के दूसरे और दूसरे से तीसरे लाइन को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करेगा |

ये काम तब तक करेगा जब तक उस प्रोग्राम के किसी भी लाइन में कोई error ना हो | अगर प्रोग्राम की किसी लाइन में कोई error मिलती है तो इंटरप्रेटर आगे किसी भी लाइन को ट्रांसलेट और रन नहीं करेगा जब तब उस error वाले लाइन को सही न कर लिया जाये |

Python, Perl जैसे लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम को मशीन लैंग्वेज या बाइनरी लैंग्वेज में कन्वर्ट करने के लिए इंटरप्रेटर (Interpreter) का उपयोग किया जाता हैं |

इंटरप्रेटर की मुख्य विशेषताएं | Key Features of Interpreter In Hindi

  1. Interpreter हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए कोड (Source Code) को लेकर सबसे पहले उसे intermediate कोड में convert करता है फिर उस intermediate कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है | ये intermediate कोड असेम्बलर कोड की तरह ही होता है | 
  1. Interpreter सोर्स कोड को लेकर उसे line by line मशीन कोड में कन्वर्ट करता है | 
  1. Interpreter एक सिंगल इंस्ट्रक्शन को इनपुट के रूप में लेता है ओर उसे मशीन कोड में कन्वर्ट करता है | 
  1. Interpreter के केस में किसी भी तरह का ऑब्जेक्ट कोड generate नहीं होता | 
  1. Interpreter प्रोग्राम execution के लिए कम्पाइलर की तुलना में ज्यादा टाइम लेता है | 
  1. Python, Perl, VB, PostScript, LISP आदि लैंग्वेज में लिखे गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करने के लिए Interpreter का उपयोग किया जाता है | 
  1. Interpreter को कम्पाइलर की तुलना में काफी कम मेमोरी की जरुरत होती है | 
  1. Interpreter में अगर प्रोग्राम में कोई मॉडिफिकेशन होता है तो पुरे प्रोग्राम को फिर से compile करना नहीं पड़ता है | 
  1. Interpreter कम्पाइलर की तुलना में काफी स्लो होता है | 
  1. Interpreter में प्रोग्राम execution के समय हर बार स्कैन और ट्रांसलेट करना  होता है | 
  1. यदि प्रोग्राम के किसी भी लाइन में error होता है तो Interpreter अपना काम बंद कर देता है और उस error के ठीक होने के बाद ही अपना काम फिर से स्टार्ट करता है | 
  1. जितनी बार प्रोग्राम execute होता उतनी बार इंटरप्रेटर प्रोग्राम के हर लाइन को चेक करके मशीन कोड में translate करता है | 
  1. प्रोग्राम को fast debugging करने के लिए Interpreter काफी अच्छा होता है | 

दोस्तों यहाँ तक आपको समझ आ गया होगा कि Assembler Kya Hai?, Compiler Kya Hai?,और Interpreter Kya Hai?

आइये अब हम ये देख लेते है कि असेम्बलर और कम्पाइलर के बिच क्या अंतर है? (Difference Between Assembler And Compiler In Hindi) असेम्बलर और इंटरप्रेटर के बिच क्या अंतर है? (Difference Between Assembler And Interpreter In Hindi) तथा कम्पाइलर और इंटरप्रेटर के बिच क्या अंतर है? (Difference Between Compiler and Interpreter In Hindi) |

असेम्बलर और कम्पाइलर के बिच अंतर | Difference Between Assembler And Compiler In Hindi

AssemblerCompiler
Assembler असेंबली लैंग्वेज के कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है |Compiler हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है |
Assembler पुरे कोड को एक बार में ही मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट नहीं करता |Compiler पुरे कोड को एक बार में ही मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है | 
असेम्बलर के दो Phase है -:
First Phase
Second Phase
कम्पाइलर के 7 Phase हैं :
Lexical Analyser
Syntax analyser
Semantic analyser
Intermediate code generated
Code optimiser
Code generator
Error handler
Assembler असेंबली लेवल कोड को इनपुट के रूप में लेता है |Compiler सोर्स कोड को इनपुट के रूप ले लेता है |
Assembler कम्पाइलर की तुलना में कम intelligent होता है |Compiler असेम्बलर की तुलना में ज्यादा intelligent होता है |
Assembler का आउटपुट बाइनरी कोड होता  है।Compiler का आउटपुट मशीन कोड का एक mnemonic version है।
Assembler का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाता है GAS, GNU |Compiler के माध्यम से निम् लैंग्वेज में लिखे गए कोड को Compile किया जाता है C, C++, Java, and C# आदि | 
असेम्बलर के उदाहरण निम्नलिखित है -:
One pass assemblers
Load-and-go assemblers
कम्पाइलर के उदाहरण निम्नलिखित है -:
Cross-compiler
Bootstrap compiler
Decompiler
Source-to-source compiler
Assembler vs Compiler In Hindi

असेंबलर और कंपाइलर के बीच महत्वपूर्ण अंतर (Key Differences Between Compiler and Assembler in Hindi)

  1. Assembler और Compiler के बीच मुख्य अंतर यह है कि असेंबलर relocatable मशीन कोड उत्पन्न करता है जबकि कंपाइलर असेंबली कोड generate करता है और कुछ कंपाइलर सीधे executable योग्य कोड भी उत्पन्न कर सकते हैं |
  1. असेंबलर इनपुट के रूप में असेंबली कोड लेता है और कंपाइलर, Preprocessor द्वारा उत्पन्न preprocessed कोड को इनपुट के रूप में लेता है।
  1. Compilation दो चरणों में होता है जो analysis phase और synthesis phase हैं।  analysis phase  में, इनपुट exical analyzer, syntax analyzer, semantic analyzer  के माध्यम से जाता है, जबकि  synthesis  विश्लेषण मध्यवर्ती कोड जेनरेटर, code optimizer, कोड जेनरेटर के माध्यम से होता है। दूसरी ओर, assembler इनपुट को  दो चरणों में होता है  पहला चरण addresses का पता लगाता है और दूसरे चरण में assembly code को बाइनरी कोड के लिए translate करता है | 
  1. कंपाइलर द्वारा उत्पन्न असेंबली कोड मशीन कोड का एक एमनोमोनिक संस्करण है। हालाँकि, असेंबलर द्वारा उत्पन्न relocatable मशीन कोड एक binary relocatable code है।
  1. Assembler असेंबली लैंग्वेज के कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है जबकि Compiler हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है |
  1. Assembler पुरे कोड को एक बार में ही मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट नहीं करता | जबकि कम्पाइलर पुरे कोड को एक बार में ही मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है | 
  1. Assembler असेंबली लेवल कोड को इनपुट के रूप में लेता है तो Compiler सोर्स कोड (हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए कोड ) को इनपुट के रूप ले लेता है |
  1. असेम्बलर हम Intelligent होता है जबकि कम्पाइलर असेम्बलर की तुलना में ज्यादा intelligent होता है |
  1. असेम्बलर का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाता है GAS, GNU |  कम्पाइलर के माध्यम से निम्न लैंग्वेज में लिखे गए कोड को compile किया जाता है -: C, C++, Java, and C# आदि | 
  1. असेम्बलर के उदाहरण निम्नलिखित है -: One pass assemblers, Load-and-go assemblers और कम्पाइलर के उदाहरण निम्न है Cross-compiler, Bootstrap compiler, De-compiler, Source-to-source compiler

असेम्बलर और इंटरप्रेटर के बिच अंतर | Difference Between Assembler And Interpreter In Hindi

Assembler Interpreter
यह असेंबली लैंग्वेज में लिए गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है |यह हाई लेवल लैंग्वेज में लिए गए कोड को मशीन लैंगुएज में कन्वर्ट करता है |
एक असेंबलर के लिए प्रोग्राम particular hardware के लिए लिखा गया है।एक Interpreter के लिए प्रोग्राम particular language के लिए लिखा जाता है।
Assembler चलने से पहले पूरे प्रोग्राम को translate करता है।यह program instructions को Line by Line ट्रांसलेट करता है।
प्रोग्राम चलने से पहले errors को डिस्प्ले कर देता है | प्रोग्राम के किसी भी Instruction में error होने पर उसे तुरंत डिस्प्ले करता है | 
Executable file बनाने के लिए Assembler का उपयोग एक बार ही करना पड़ता है | इंटरप्रेटर का उपयोग तक तक होता है जब तक प्रोग्राम रन कर रहा होता है | 
इसमें ज्यादा मेमोरी की जरुरत नहीं होती | इसमें ज्यादा मेमोरी की जरुरत होती है  | 
असेम्बलर का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाता है GAS, GNUइंटरप्रेटर के माध्यम से निम्न लैंग्वेज में लिखे गए कोड को इंटरप्रेट किया जाता है  PHP, Python, Perl, Ruby. आदि | 
Assembler vs Interpreter In Hindi

असेंबलर और इंटरप्रेटर के बीच महत्वपूर्ण अंतर (Key Difference Between Assembler And Interpreter In Hindi)

  1. असेम्बलर, असेंबली लैंग्वेज में लिए गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करता है | जबकि इंटरप्रेटर हाई लेवल लैंग्वेज में लिए गए कोड को मशीन लैंगुएज में कन्वर्ट करता है |
  1. असेंबलर के लिए प्रोग्राम particular hardware के लिए लिखा गया है जबकि Interpreter के लिए प्रोग्राम particular language के लिए लिखा जाता है।
  1.  असेंबलर चलने से पहले पूरे प्रोग्राम को translate करता है और इंटरप्रेटर program instructions को Line by Line ट्रांसलेट करता है।
  1. असेंबलर में ज्यादा मेमोरी की जरुरत नहीं होती जबकि इंटरप्रेटर में ज्यादा मेमोरी की जरुरत होती है  | 
  1. असेम्बलर का उपयोग निम्नलिखित के लिए किया जाता है GAS, GNU और इंटरप्रेटर के माध्यम से निम्न लैंग्वेज में लिखे गए कोड को इंटरप्रेट किया जाता है  PHP, Python, Perl, Ruby. आदि | 

कम्पाइलर और इंटरप्रेटर के बिच अंतर | Difference Between Compiler and Interpreter In Hindi

CompilerInterpreter
Compiler हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम कोड को मशीन कोड में परिवर्तित करता है और फिर उसे execute करता है।Interpreter सोर्स कोड को intermediate रूप में परिवर्तित करता है और फिर उस intermediate कोड को मशीन कोड में परिवर्तित करता है | 
Compiler प्रोग्राम को मशीन कोड में translate करने से पहले पूरे प्रोग्राम को स्कैन करता है।Interpreter प्रोग्राम को line by line स्कैन करता है और मशीन कोड के रूप में translate करता है।
कंपाइलर पूरे प्रोग्राम को इनपुट के रूप में लेता है।Interpreter इनपुट के रूप में सिंगल Instruction को लेता है।
Compiler के केस में object कोड generate होता है | Interpreter के केस में किसी भी तरह का ऑब्जेक्ट कोड generate नहीं होता | 
कम्पाइलर execution में कम समय लेता है | Interpreter प्रोग्राम execution के लिए कम्पाइलर की तुलना में ज्यादा टाइम लेता है | 
कम्पाइलर के माध्यम से निम्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखे गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट किया जाता है -: C, COBOL, C#, C++, आदि | Python, Perl, VB, PostScript, LISP आदि लैंग्वेज में लिखे गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करने के लिए Interpreter का उपयोग किया जाता है | 
Compiler को Interpreter की तुलना में काफी ज्यादा मेमोरी की जरुरत होती है | Interpreter को कम्पाइलर की तुलना में काफी कम मेमोरी की जरुरत होती है | 
कम्पाइलर में अगर प्रोग्राम में कोई modification होता है तो पुरे प्रोग्राम को फिर से compile करना पड़ता है | Interpreter में अगर प्रोग्राम में कोई modification होता है तो पुरे प्रोग्राम को फिर से compile करना नहीं पड़ता है | 
Compiler काफी फ़ास्ट होता है | Interpreter कम्पाइलर की तुलना में काफी स्लो होता है | 
Compiler में प्रोग्राम को कम्पाइल करने के बाद उसे बार बार कम्पाइल करने की जरुरत नहीं होती | Interpreter में प्रोग्राम को कम्पाइल करने के बाद उसे बार बार कम्पाइल करने की जरुरत होती है | 
अगर प्रोग्राम में कोई error होता है तो Compiler प्रोग्राम को कम्पाइल करने के बाद error की लिस्ट प्रदान कर देता है | यदि प्रोग्राम के किसी भी लाइन में error होता है तो Interpreter एक-एक करके प्रत्येक पंक्ति की error को प्रदर्शित करता है। 
कम्पाइलर में debugging करना थोड़ा स्लो होता है | Interpreter में debugging करना फ़ास्ट होता है | 
Compiler vs Interpreter In Hindi

कंपाइलर और इंटरप्रेटर के बीच महत्वपूर्ण अंतर (Key Difference Between Compiler and Interpreter In Hindi)

  1. कंपाइलर हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम कोड को मशीन कोड में परिवर्तित करता है और फिर उसे execute करता है। जबकि Interpreter सोर्स कोड को intermediate रूप में परिवर्तित करता है और फिर उस intermediate कोड को मशीन कोड में परिवर्तित करता है | 
  1. कम्पाइलर execution में कम समय लेता है | जबकि Interpreter प्रोग्राम execution के लिए कम्पाइलर की तुलना में  ज्यादा टाइम लेता है | 
  1. कंपाइलर compilation के बाद सभी errors को प्रदर्शित करता है, दूसरी ओर, Interpreter एक-एक करके प्रत्येक line के errors को प्रदर्शित करता है।
  1. कंपाइलर translation लिंकिंग-लोडिंग मॉडल पर आधारित है, जबकि Interpreter इंटरप्रिटेशन विधि पर आधारित है।
  1. Compiler पूरे प्रोग्राम को लेता है जबकि Interpreter कोड की एक लाइन लेता है।
  1. कम्पाइलर के केस में ऑब्जेक्ट कोड generate होता है | Interpreter के केस में किसी भी तरह का ऑब्जेक्ट कोड generate नहीं होता | 
  1. कम्पाइलर को ज्यादा मेमोरी की जरुरत होती है और Interpreter को कम्पाइलर की तुलना में काफी कम मेमोरी की जरुरत होती है | 
  1. कम्पाइलर में debugging करना थोड़ा स्लो होता है और  Interpreter में debugging करना फ़ास्ट होता है | 
  1. कम्पाइलर काफी फ़ास्ट होता है | जबकि Interpreter कम्पाइलर की तुलना में काफी स्लो होता है | 
  1. कम्पाइलर में प्रोग्राम को कम्पाइल करने के बाद उसे बार बार कम्पाइल करने की जरुरत नहीं होती |  जबकि Interpreter में प्रोग्राम को कम्पाइल करने के बाद उसे बार बार कम्पाइल करने की जरुरत होती है | 
  1. कम्पाइलर में अगर प्रोग्राम में कोई मॉडिफिकेशन होता है तो पुरे प्रोग्राम को फिर से compile करना पड़ता है | जबकि Interpreter में अगर प्रोग्राम में कोई मॉडिफिकेशन होता है तो पुरे प्रोग्राम को फिर से compile करना नहीं पड़ता है | 
  1. कम्पाइलर के माध्यम से निम्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखे गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट किया जाता है -: C, COBOL, C#, C++, आदि | Python, Perl, VB, PostScript, LISP आदि लैंग्वेज में लिखे गए कोड को मशीन लैंग्वेज में कन्वर्ट करने के लिए Interpreter का उपयोग किया 

Conclusion -:

दोस्तों यहाँ तक पढ़ने के बाद आपको समझ आ ही गया होगा की असेम्बलर क्या है? (What is Assembler in Hindi), कम्पाइलर क्या हैं? (What is Compiler in Hindi) और इंटरप्रेटर क्या होता है? (What is interpreter in Hindi) और इनका उपयोग क्यों किया जाता हैं |

आइये अभी तक हमने पीछे जो कुछ भी पढ़ा उसका एक संक्षिप्त विवरण देखते हैं – :

  1. Assembler ,Compiler और Interpreter तीनो ही प्रोग्रामर द्वारा लिखे गए प्रोग्राम को मशीन के समझने वाली भाषा मशीन लैंग्वेज या बाइनरी लैंग्वेज में कन्वर्ट करते है जिससे की मशीन (Computer) प्रोग्राम को समझ कर दिए गए इंस्ट्रक्शन को एक्सेक्यूट कर सके |
  1. असेम्बलर असेंबली लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम्स को मशीन कोड में कन्वर्ट करता है और कम्पाइलर तथा इन्टरप्रिटर दोनों हाई लेवल लैंग्वेज में लिखे गए प्रोग्राम को मशीन कोड में कन्वर्ट करता है |

तो दोस्तों आज हमने सीखा की Assembler Kya Hai, Compiler Kya Hai और Interpreter Kya Hai तथा इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता हैं ?

साथ ही हमने यह भी देखा कि असेम्बलर और कम्पाइलर के बिच क्या अंतर है? (Difference Between Assembler And Compiler In Hindi) असेम्बलर और इंटरप्रेटर के बिच क्या अंतर है? (Difference Between Assembler And Interpreter In Hindi) तथा कम्पाइलर और इंटरप्रेटर के बिच क्या अंतर है? (Difference Between Compiler and Interpreter In Hindi)

दोस्तों आशा करता हु कि आपको ये पोस्ट पसंद आई होगी और आपको “Assembler Kya Hai? (What is Assembler in Hindi), Compiler Kya Hai? (What is Compiler in Hindi) और Interpreter Kya Hai? (What is interpreter in Hindi) ” के बारे में काफी जानकरी हुई होगी |

अगर आपको किसी और चीज के बारे में जानना चाहते हो तो जरूर बताये मैं आपके सभी सवालों का जवाब अवश्य दूंगा |

अगर आपको ये पोस्ट “असेम्बलर क्या है? (What is Assembler in Hindi), कम्पाइलर क्या हैं? (What is Compiler in Hindi) और इंटरप्रेटर क्या होता है? (What is interpreter in Hindi)” पसंद आया हो तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे

ताकि उनको भी “Assembler Kya Hota Hai?, Compiler Kya Hota Hai? और Interpreter Kya Hota Hai? तथा इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता हैं ?” के बारे में अच्छे से जानकारी प्राप्त हो सके |

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5 thoughts on “Assembler, Compiler और Interpreter क्या है? [Full Information – हिंदी में]”

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