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एनालॉग सिग्नल और डिजिटल सिग्नल क्या है? – Analog Signal And Digital Signal In Hindi

हेलो फ्रेंड्स, आज के इस आर्टिकल में हम एनालॉग सिग्नल और डिजिटल सिग्नल के बारे में बात करने वाले है। मगर एनालॉग सिग्नल क्या है और डिजिटल सिग्नल क्या है? ये जानने से पहले आपको ये समझना जरुरी है कि सिग्नल क्या होता है? और इनका क्या उपयोग है?

तो आइये अब बिना समय गवाए सबसे पहले ये जान लेते है कि सिग्नल क्या होता है? और इनका क्या उपयोग है?

सिग्नल क्या होता है? – What Is Signal In Hindi

सिग्नल एक इलेक्ट्रॉनिक वेव होती है, जिनकी सहायता से डाटा को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा सकता है।  

सिग्नल के दो रूप होते है एक एनालॉग सिग्नल जिसे सरल सिग्नल भी कहा जाता है और दूसरा डिजिटल सिग्नल जिसे बाइनरी सिग्नल भी कहा जाता है। इन सिग्नल की सहायता से इमेज, ऑडियो व वीडियो आदि का आदान प्रदान किया जाता है।

डाटा के ट्रांसमिशन के लिए डाटा को सिग्नल में बदलकर उसे संचारित करने योग्य बनाया जाता है। दुसरे शब्दों में, स्मार्टफोन का उपयोग करते समय भेजे जाने वाले डाटा को पहले इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल में बदला जाता है,

यह सिग्नल frequency व bandwidth के साथ आसपास के टावर से सिग्नल स्वचिंग सेंटर में पहुंचती है, जहां डाटा को उनके निर्धारित स्थान तक पहुंचा दिया जाता है। यह डाटा अपनी प्रकृति के अनुसार ही सिग्नल के दोनो रूपो में संचारित किया जाता है। सरल शब्दों में कहे तो ऑडियो सिग्नल एनालॉग सिग्नल के लिए उपयुक्त होते हैं, जबकि डिजिटल सिग्नल कंप्यूटर डाटा के लिए।

आइये अब हम विस्तार से ये जान लेते है कि Analog Signal Kya Hai और Digital Signal Kya Hai  तथा एनालॉग सिग्नल और डिजिटल सिग्नल में क्या अंतर है? (Difference Between Analog Signal And Digital Signal In Hindi)

एनालॉग सिग्नल और डिजिटल सिग्नल क्या है? - Analog Signal And Digital Signal In Hindi

एनालॉग सिग्नल क्या है? – What Is Analog Signal In Hindi

एनालॉग सिग्नल नियमित इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल है, यह सिग्नल समय के साथ बदलते रहते है। यह सिग्नल sine wave की भांति प्रसारित होते है, अर्थात् यह श्रंग और गर्त बनाते हुए प्रसारित होती है। 

एक श्रंग, तरंग की महत्तम ऊंचाई का मान है तथा एक गर्त, तरंग की महत्तम गहराई का मान होता है। यह जितनी सकारात्मक दिशा में प्रसारित होती है, उतनी ही नकारात्मक दिशा में। अतः इनकी मान सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी। इनके इसी गुण के कारण ये ध्वनि तरंगों के प्रसारण में अधिक उपयोग होती है।

Analog Signal - Masterprogramming.in

एनालॉग सिग्नल के संचरण के लिए इन्हें simple व composite सिग्नल में वर्गीकृत किया जाता है, एक simple Analog Signal विघटित नहीं किया जा सकता है जबकि एक composite Analog Signal को कई साइन तरंगों में विघटित किया जा सकता है। 

एक एनालॉग सिग्नल एक तरंग के रूप में डाटा संचारित करता है इसकी कोई निश्चित सीमा नहीं होती है।

एनालॉग सिग्नल, डाटा कम्युनिकेशन, डाटा ट्रांसमिशन एवम कंप्यूटर नेटवर्क के संचरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनका उपयोग मुख्य रूप से ऑडियो और वीडियो को स्थांतरित करने के लिए किया जाता है। मानव ध्वनि इसका एक उदाहरण है। 1990 के पहले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे कि पुराने रेडियो, माइक्रोफोन, हैंडसेट टेलीविजन आदि में एनालॉग सिग्नल का उपयोग होता था।

एनालॉग सिग्नल के फायदे – Advantages of Analog Signal In Hindi

  • एनालॉग सिग्नल समय के साथ बदलता है, इसलिए इसकी प्रोसेस आसान हैं।
  • एनालॉग सिग्नल ध्वनि व वीडियो के प्रसारण में बेहतर साबित होता है।
  • एनालॉग सिग्नल अधिक घनत्व वाले सिग्नल होने के कारण अधिक विस्तृत जानकारी प्रसारित कर सकता है।
  • ऐसे कार्य जिनमे कम बैंडबिड्थ की जरूरत होती हैं, वहां एनालॉग सिग्नल बहुत उपयोगी सिद्ध होते है।
  • एनालॉग सिग्नल पोर्टेबल हैं अतः यह साउंड को बेहतर प्रसारित करते है।
  • यह सिग्नल audio और video transmission के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है।

एनालॉग सिग्नल के नुकसान – Disadvantages of Analog Signal In Hindi

  • एनालॉग सिग्नल की गुणवत्ता कम होती है।
  • इन सिग्नल के तार महंगे होते है इन्हे आसानी से बदला नही जा सकता।
  • इन सिग्नल में डिजिटल मॉडल की अधिक कमी होती है।
  • इनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं होती है। इन पर अन्य सिग्नल का अधिक प्रभाव पड़ता है।

आइये अब हम ये जान लेते है कि डिजिटल सिग्नल क्या है? (What is Digital Signal In Hindi) डिजिटल सिग्नल के क्या फायदे व क्या नुकसान है तथा एनालॉग सिग्नल और डिजिटल सिग्नल में क्या अंतर है? (Analog Signal and Digital Signal Difference In Hindi)

डिजिटल सिग्नल क्या है? – What Is Digital Signal In Hindi

डिजिटल सिग्नल एक ऐसा सिग्नल है जिसका न्यूनतम मान 0 व अधिकतम मान 1 रहता है। 0 और 1 को बाइनरी नंबर कहते है, जो एक कंप्यूटर लैंग्वेज है। 

यह सिग्नल एनालॉग से कुछ अलग होते है, यह एक प्रकार की हार्मोनिक तरंग होती है जो सदैव सकारात्मक रहती है और अपने एक ही मार्ग को दोहराती रहती है। 

Digital Signal - Masterprogramming.in

डिजिटल सिग्नल के संबंध में दो शब्द प्रचलित है – बिट रेट और बिट अंतराल। एक सेकंड में भेजे जाने वाली बिट्स की संख्या को बिट रेट कहते है तथा एक बिट को भेजने में लगे समय को बिट समय अंतराल कहते है।

इस प्रकार के सिग्नल को transfer करने करने के लिए केबल का उपयोग में लाया जाता है एवम इस सिग्नल को कुछ किलोमीटर के अंदर तक ही ट्रांसमिट किया जाता है।

डिजिटल सिग्नल को प्रसारित करना आसान होता है, यह अधिक विश्वसनीय होते है। इनकी सीमा निर्धारित होती है इसलिए इनमें गड़बड़ी का कम खतरा होता। यह ट्रांसमिशन के लिए उपयोग में लाई जाने वाली तरंग है।

डिजिटल तरंग में दो लॉजिक होते है लो लॉजिक और हाई लॉजिक। लो लॉजिक, 0 को प्रदर्शित करता है और हाई लॉजिक, 1 को प्रदर्शित करता है।

डिजिटल सिग्नल दो तरीके से ट्रांसमिट किया जा सकता है -:

1) बेसबैंड ट्रांसमिशन – इस प्रकार के ट्रांसमिशन में डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में बदलने की आवश्यकता नहीं होती है, इस ट्रांसमिशन के लिए लो पास चैनल अर्थात 0 बैंडबिथ की आवश्यकता होती है।

2) ब्रोडबैंड ट्रांसमिशन – इस प्रकार के ट्रांसमिशन में डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में बदलने की आवश्यकता होती है, इस ट्रांसमिशन के लिए हाई पास चैनल अर्थात 1 बैंडबिथ की आवश्यकता होती है।

डिजिटल सिग्नल के लाभ – Advantages of Digital Signal In Hindi

  • डिजिटल सिग्नल को उत्पन्न करना आसान है, इसके लिए स्विचिंग सर्किट का उपयोग करते है।
  • इन सिग्नल के मान का कोई महत्व नहीं होता है परंतु इनकी रेंज का महत्व अधिक होता है।
  • इसने डाटा को स्टोर करना एनालॉग सिग्नल की तुलना में अधिक आसान है।
  • डिजिटल सिग्नल की शुद्धता अधिक होती हैं तथा इसकी शुद्धता को बढ़ाया जा सकता है।
  • डिजिटल सिग्नल को कंप्यूटर की सहायता से बनाया जा सकता है ।
  • डिजिटल सिग्नल पर शोर का प्रभाव नही पड़ता है।
  • डिजिटल सिग्नल में गलती पता करना व उसे सही करना आसान होता है।
  • डिजिटल सिग्नल अधिक सुरक्षित है तथा अधिक विश्वसनीय है।
  • इसमें Accuracy अधिक होती है और switching circuit की संख्या अधिक कर accuracy को बढ़ाया जा सकता है।

डिजिटल सिग्नल के नुकसान – Disadvantages of Digital Signal In Hindi

  • डिजिटल सिग्नल, एनालॉग सिग्नल के मुकाबले काफी ज्यादा बैंडविथ का इस्तेमाल करता है
  • इन सिग्नल की प्रोसेसिंग कठिन होती है तथा इनकी गति सीमित होती है।
  • डिजिटल सिग्नल महंगे होते है।

एनालॉग सिग्नल और डिजिटल सिग्नल में अंतर (Difference Between Analog Signal And Digital Signal In Hindi)

  • एनालॉग सिग्नल सतत सिग्नल है यह समय के साथ बदलते रहते है, लेकिन डिजिटल सिग्नल बाइनरी डाटा को ले जाते हैं। यह समय के साथ नही बदलते है।
  • एनालॉग सिग्नल sine तरंग है, जबकि डिजिटल सिग्नल square तरंग होती है।
  • एनालॉग सिग्नल किसी भी जानकारी को एकल रूप में प्रसारित करते है, जबकि डिजिटल सिग्नल किसी भी जानकारी को बिट के रूप में प्रसारित करते है।
  • एनालॉग सिग्नल में डेटा के नुकसान की संभावना अधिक होती है, जबकि डिजिटल सिग्नल में डेटा के नुकसान की संभावना कम होती है।
  • एनालॉग सिग्नल में वास्तविक आवाज व चित्र होता है, जबकि डिजिटल सिग्नल में डेटा बाइनरी संकेत के रूप में रहता है तथा इन बाइनरी संकेतो को चित्र व आवाज में परिवर्तित किया जाता है।
  • एनालॉग सिग्नल सस्ती होता है, जबकि डिजिटल सिग्नल एनालॉग सिग्नल की तुलना में महंगा होता  है।
  • एनालॉग सिग्नल कोई निश्चित सीमा का पालन नही करता है, जबकि डिजिटल सिग्नल की सीमा 0 से 1 निश्चित होती है।
  • एनालॉग सिग्नल ऑडियो व वीडियो के प्रसारण में अधिक उपयोगी होते है, जबकि डिजिटल सिग्नल कम्प्यूटिंग और डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उपयुक्त है। सरल शब्दों में डिजिटल सिग्नल कंप्यूटर के डाटा के आदान प्रदान के लिए बेहतर साबित होता है यह इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को बिना कोई नुकसान पहुंचाए अपने गंतव्य तक पहुंचा देता है, इसकी सहायता से कंप्यूटर में डाटा संग्रहित करके रखा जा सकता है।
  • एनालॉग सिग्नल तरंग के आयाम, आवृति व अवधि चरण के आधार पर वर्णित किए जाते है, जबकि डिजिटल सिग्नल बिट दर और बिट अंतराल के आधार पर वर्णित किए जाते है।
  • एनालॉग सिग्नल की प्रतिबाधा कम होती हैं, जबकि डिजिटल सिग्नल की प्रतिबाधा अधिक होती है।
  • एनालॉग सिग्नल अधिक पावर का उपयोग करते है, जबकि डिजिटल सिग्नल कम पावर का उपयोग करते है।
  • एनालॉग सिग्नल की ट्रांसमिशन की दर धीमी होती है, जबकि डिजिटल सिग्नल की ट्रांसमिशन की दर तीव्र होती है।
  • एनालॉग सिग्नल का ट्रांसमिशन का माध्यम वायर व वायरलैस होता है, जबकि डिजिटल सिग्नल का ट्रांसमिशन एक वायर के माध्यम से होता है ।
  • एनालॉग सिग्नल की प्रकृति निरंतर होती है, जबकि डिजिटल सिग्नल की प्रकृति असतत होती है।
  • एनालॉग सिग्नल निरंतर विभिन्न आयाम मानो का प्रयोग करते है परंतु डिजिटल सिग्नल में अंतराल वाले स्थानों पर अलग अलग मानो का एक सीमित सेट होता है।

एनालॉग सिग्नल का डिजिटल सिग्नल में बदलना (Convert Analog Signal To Digital Signal)

एनालॉग सिग्नल को डिजिटल सिग्नल में बदलने के लिए एक A/D convertor की आवश्यकता होती है। इस convertor के दो मुख्य कार्य  होते है –

  1. Sampling and holding

इस प्रक्रिया में सिग्नल से डाटा का sample लिया जाता है और उसे कुछ समय तक hold किया जाता है जिससे इनपुट की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सके। Sampling की निम्नवत दर इनपुट सिग्नल की frequency को दोगुना तक बड़ा देती है।

  1. Qhantizing and encoding

इस प्रक्रिया में सिग्नल को quant मे बांट कर इसे quantum से मेल किया जाता है और फिर मेल के अनुसार ही सिग्नल को अलग अलग कोड दिए जाते है।

डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में बदलना (Convert Digital Signal To Analog)

कंप्यूटर केवल डिजिटल सिग्नल को ही पहचानता है, इसलिए आउटपुट देते समय डिजिटल सिग्नल को एनालॉग में परिवर्तित करना आवश्यक होता है ताकि इनपुट को समझने में कोई परेशानी न आए। इस प्रक्रिया के लिए D/A convertor की आवश्यकता होती है।

D/A convertor मुख्यता दो प्रकार के होते है–

  1. Binary weighted D/A convertor

यह convertor सिग्नल को परिवर्तित करने के लिए inverting summing op amp का प्रयोग करता है, इसमें आउटपुट वोल्टेज बाइनरी नंबर के समानुपाती होता है, यह convertor 4 bit डिजिटल सिग्नल के बराबर एनालॉग आउटपुट देता है।

  1. R – 2R ladder digtal to analog convertor

यह convertor R व 2R केवल दो मान का प्रयोग करता है, इसके सिग्नल, R व 2R आउटपुट को summing op amp को दिया जाता है, जो इसे एनालॉग ने बदल देता है।

एनालॉग उपकरण तथा डिजिटल उपकरण की तुलना 

  • एनालॉग उपकरण सस्ते होते है परंतु इनकी समय सीमा निश्चित होती है। डिजिटल उपकरण, एनालॉग उपकरणों से महंगे होते है। 
  • एनालॉग तकनीक में मानव भाषण जैसे प्राकृतिक संकेत शामिल है, जबकि डिजिटल तकनीक से इस मानव भाषण को कंप्यूटर में संग्रहित किया जा सकता है। अतः कहा जा सकता है कि डिजिटल उपकरण, एनालॉग उपकरणों से अधिक उपयोगी होते है। 

निष्कर्ष

दोस्तों आज के इस आर्टिल्स में हमने Analog Signal and Digital Signal के बारे में बात की और जाना कि एनालॉग सिग्नल क्या है? (What is Analog Signal In Hindi) डिजिटल सिग्नल क्या है? (What is Digital Signal In Hindi) तथा एनालॉग सिग्नल और डिजिटल सिग्नल में क्या अंतर है? (Difference Between Analog Signal And Digital Signal In Hindi)

तो दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा और यदि ये आर्टिकल आपको पसंद आया है तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों को शेयर करना न भूलिएगा ताकि उनको भी Analog Signal Kya Hai और Digital Signal Kya Hai के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके .

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