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Router क्या है? – What Is Router In Hindi

Router Kya Hai? – राउटर एक नेटवर्किंग डिवाइस हैं जो OSI मॉडल की तीसरे लेयर पर कार्य करता हैं। यह कंप्यूटर नेटवर्क में डेटा पैकेट के आदान प्रदान का कार्य करता हैं। जब कोई डेटा पैकेट आता है, तब राउटर उस डाटा पैकेट को रिसीव करके उसमे मौजूद IP Address के अनुसार उसे उसके गंतव्य तक पहुचा देता है। 

यह दो या दो से अधिक नेटवर्क के बीच संचार करने के लिए ICMP जैसे प्रोटोकॉल का उपयोग करता है। 

राउटर एक इंटरनेटवर्किंग डिवाइस है जिसे कंप्यूटर नेटवर्क के बीच डेटा पैकेट प्राप्त करने, विश्लेषण करने और अग्रेषित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 

तो दोस्तों यह थी Router की एक बेसिक सी जानकारी, यदि आप इसके बारे में Detail में जानना चाहते है तो आप इस आर्टिकल को आगे पढ़ते रहे क्योकि आज के इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि Router Kya Hai? राउटर कैसे काम करता है? राउटर कितने प्रकार के होते है और राउटर के क्या फायदे व क्या नुकसान है? 

तो आइये अब बिना समय गवाए विस्तार से जानते है कि राउटर क्या है? (What is Router In Hindi)

Router क्या है? - What Is Router In Hindi

राउटर क्या है? – What Is Router In Hindi

राउटर एक इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर उपकरण है इसका उपयोग दो या दो से अधिक कंप्यूटर नेटवर्क के बीच डाटा पैकेट के आदान प्रदान करने हेतु किया जाता है। 

राउटर 1974 में बनाया गया था, इसका विचार International Working Group नाम की एक संस्था ने किया था, इस डिवाइस को बनाने के लिए international federation for information processing  नाम की कमेटी का गठन किया गया। इससे पहले मिनी कंप्यूटर को राउटर के रूप में उपयोग किया जाता था। 

यह एक नेटवर्किंग उपकरण हैं जो कंप्यूटर नेटवर्क के मध्य डेटा पैकेट को IP Address की सहायता से ट्रांसफर करता है। 

इंटरनेट से डेटा हमेशा पैकेट के माध्यम से भेजा जाता है, राउटर इन डाटा पैकेट को रिसीव करता है, इनकी इनफार्मेशन को एनालाइज करता है और इसे अन्य डिवाइसेज तक भेज देता हैं। ये डिवाइसेज अलग अलग नेटवर्क के साथ वायर और वायरलेस तरीके से जुड़े हो सके है। 

राउटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनो से मिलकर बना होता है, जिनमे सीपीयू, ऑपरेटिंग सिस्टम, स्टोरेज डिवाइस शामिल है। 

राउटर के प्रमुख भाग रूटिंग एल्गोरिथम और रूटिंग टेबल है, रूटिंग एल्गोरिथम और रूटिंग टेबल के द्वारा ही पता चलता है कि प्राप्त पैकेट किस डिवाइस  तक भेजना है। 

राउटर, डाटा भेजने के लिए शोटेस्ट पाथ को ढूंढता है, इसके लिए राउटर टेबल में बहुत सारे रिसीवर एड्रेस की लिस्ट होती है।

राउटर का उपयोग LAN (Local Area Network) और WAN (Wide Area Network)  में किया जाता है। यह नेटवर्किंग में अन्य राउटर के साथ जानकारी का आदान प्रदान करता है।

यह नेटवर्क में डेटा स्थानांतरित करने के लिए Routing Protocol का उपयोग करता है। यह स्विच और हब जैसे अन्य नेटवर्किंग उपकरणों की तुलना में काफी महंगा होता  है।

राउटर काम कैसे करता है? – How Router Works In Hindi

राउटर, नेटवर्क में आने और जाने वाले इंटरनेट ट्रैफिक को कुशलता पूर्ण निर्देशित करता है कि डेटा को किस स्थान पर जाना है। 

राउटर, डेटा पैकेट को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क तक पहुंचाता है। राउटर प्राप्त डेटा पैकेट को अपने पास मौजूद रूटिंग टेबल के एड्रेसेस में चेक करता है, रूटिंग टेबल के पास जितने भी राउटर है ,उन सभी का एड्रेस और पाथ डिस्टेंस होती है, राउटर आस पास वाले एड्रेस को चुनता है और उसे पैकेट भेज देता है। जब पैकेट उस राउटर के पास पहुंच जाता है, तो वह इसी प्रक्रिया से पैकेट को अगले राउटर तक पहुंचता है, और आखिरकार पैकेट रिसीवर तक पहुंच जाता है। 

राउटर बहुत सारे नेटवर्क को जोड़कर रखता है और अपने टेबल को समय समय पर अपडेट करता रहता है।

राउटर के भाग – Parts of Router In Hindi

1) सीपीयू (CPU) 

यह राउटर का महत्वपूर्ण भाग है। कंप्यूटर की भांति यह भी राउटर का दिमाग कहलाता है। यह कमांड को प्रोसेस और एक्सक्यूट करता है, यह कॉन्फिंगर फाइल निर्देशों के अनुसार डेटा पैकेट को उनके लक्ष्य तक पहुंचाने में अन्य भागों की सहायता करता है।

2) ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) 

यह राउटर की सभी प्रक्रियाओ को पूर्ण करने का एक माध्यम है, यह स्टोरेज संबधित उपकरणों को निर्देश देने और उनमें संतुलन बनाए रखने का कार्य करता है, इसके अलावा यह राउटर में अन्य भागों के कार्यों में भी अपनी अहम भूमिका निभाता है ।

3) फ्लैश मैमोरी (Flash Memory) 

यह ऑपरेटिंग सिस्टम को स्टोर करके रखता है। यह कम्प्यूटर की हार्डडिस्क की भांति काम करता है और रूटिंग एल्गोरिथम, रूटिंग प्रोटोकॉल, रूटिंग टेबल को स्टोर करके रखता है ।

4) रैम (RAM) 

राउटर में रैम ठीक उसी प्रकार कार्य करती है, जिस प्रकार कंप्यूटर में करती है, इसकी सहायता से राउटर अपनी प्रोसेस को सरलता और तीव्रता से करने में सक्षम हो पता है यह एक वोलेटाइल मैमोरी है ,इसलिए इसे कार्य करने के लिए निरंतर बिजली की आवश्यकता होती है, इसकी सहायता से राउटर डेटा ट्रांसफर करने की गति में तीव्रता लाने का कार्य किया है।

5) रोम (ROM)  

इसमें डेटा केवल एक बार ही लोड किया जा सकता है, रोम डेटा पैकेट को रीड करने में सहायता करता है। यह एक चिप की भांति होता है जिसे सिर्फ एक ही बार प्रोग्राम किया जा सकता है इसमें बिजली प्रवाह न होने पर भी डेटा स्थिर रहता है ।

6) नेटवर्क इंटरफेस और कंसोल (Network Interface and Console) 

राउटर में हमेशा बहुत सारे इंटरफेस रहते है, इनमे बहुत सारे ड्राइवर होते है, इन्ही ड्राइवर से राउटर को पता चलता है कि कौन से पोर्ट में कौन सा नेटवर्क कनेक्ट है और किस रूट पर उसे डेटा को आगे बढ़ाना है। 

राउटर की कंफीगरिंग और मैनेजिंग करने का काम कंसोल करता है।

राउटर के कार्य – Uses of Router In Hindi 

राउटर इनपुट पोर्ट से पैकेट रिसीव करता है, उसकी जांच करता है, रूटिंग टेबल से पैकेट को ट्रांसफर करने के लिए रूटिंग टेबल से सबसे छोटा पाथ ढूंढता है और डेटा पैकेट को आगे फॉरवर्ड करता है।

राउटर के प्रकार – Types of Router In Hindi

1) वायरलेस राउटर (Wireless Router) 

इसका उपयोग कार्यालय, स्कूल, घर, रेलवे स्टेशन आदि पर किया जाता है, इस प्रकार के राउटर को कनेक्ट करने के केबल की आवश्कता नहीं होती। यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग इंटरनेट एक्सेस करने में सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जाता है।

वायरलेस राउटर मे दी गई सीमा के भीतर ही मोबाइल और कम्प्युटर आदि डिवाइस को राउटर से कनैक्ट करके इंटरनेट एक्सेस कर सकते है। वर्तमान मे वायरलेस राउटर का उपयोग अधिक किया जाता है।   

2) ब्रॉडबैंड राउटर (Broadband Router)

इसका उपयोग कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ने के लिए किया जाता है। यह मुख्यता घरेलू उपयोग हेतु किया जाता है। इसका उपयोग विभिन्न कम्प्युटरो को आपस मे जोड़ने और इंटरनेट को कनैक्ट करने के लिए किया जाता है, इसके लिए स्पेशल टाइप का मॉडम होता है जिसमे इथरनेट और फोन जैक भी होता है। अपनी सुविधा के अनुसार वायर्ड राउटर के साथ वायरलेस राउटर को भी जोड़ा जा सकता है , इसके लिए एक इथरनेट केबल की आवश्यकता होती है, जो वायरलेस राउटर के लैन पोर्ट को वायर्ड राउटर के लैन पोर्ट से जोडती है।   

3) एज राउटर (Edge Router)

यह एक प्रकार का गेटवे राउटर होता है इस प्रकार के राउटर को नेटवर्क की बाउंडरी पर लगाया जाता है। Edge Router वह राउटर होते है, जो बाहरी प्रोटोकॉल के बीच समंजस्य स्थापित करते है , यह बाहरी प्रोटोकॉल जैसे बीजीपी (बोर्डर गेटवे प्रोटोकॉल ) को दूसरे ISP के साथ कॉन्फ़िगर करता है।  

4) कोर राउटर (Core Router)

इसका उपयोग इंटरनेट की गति बढ़ाने और दुसंचार इंटरफेस का निर्माण करने के लिए किया जाता है। यह रूटिंग प्रोटोकॉल का समर्थन करता है इसका उपयोग कोर में किया जाता है। यह लैन नेटवर्क मे बैकबोन के जैसे काम करता है। कोर राउटर नेटवर्क को एक स्टेपडाउन बैकबोन प्रदान करता है। यह एक ही संस्था की बहुत सी इमारतों के कंप्यूटर नेटवर्क को एक साथ कनैक्ट कर सकता है। 

राउटर के फायदे – Advantages of Router In Hindi

  • राउटर OSI Model की तीसरी लेयर पर काम करता है यह पोर्ट की सहायता से इंटरनेट स्पीड को तीव्र करता है। 
  • यह यूजर को नेटवर्क की सुविधा प्रदान करता है।
  • यह ऐसे डेटा को आने से रोकता है जो हानिकारक है। 
  • यह डेटा को तेजी से रिसीव करता है। 
  • राउटर छोटा नेटवर्क बनाने में सक्षम होता है।

राउटर के नुकसान – Disadvantages of Router In Hindi

राउटर के फायदों के साथ साथ इसमें कुछ कमियां भी है जो की निम्नलिखित है -:

  • एक से अधिक डिवाइसेज को एक साथ जोड़ने पर राउटर की स्पीड में कमी आ जाती है।
  • राउटर महंगे होते है।
  • इनके सुचारू रूप से काम करने के लिए लागतार बिजली की अवश्यकता होती है। 

Summary

  • राउटर, लेयर 3 नेटवर्क डिवाइस है।
  • यह विभिन्न नेटवर्क को एक साथ जोड़ता है और एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क में डेटा पैकेट का आदान प्रदान करता है।
  • राउटर का उपयोग Local Area Network और Wide Area Network दोनों में किया जाता है।
  • यह डेटा संचारित करने के लिए डेटा पैकेट में उल्लिखित आईपी एड्रेस का उपयोग करता है।
  • राउटर में एक रूटिंग टेबल होता है, रूटिंग टेबल तैयार करने या रीफ्रेश करने के लिए, राउटर एक दूसरे के साथ जानकारी साझा करते हैं जिससे समय-समय पर रूटिंग टेबल रिफ्रेश होता रहता है। 
  • राउटर अन्य नेटवर्किंग डिवाइस जैसे कि हब, स्विच की तुलना में अधिक महंगे होते हैं।
  • यह यूजर को नेटवर्क में उनकी आवश्यकताओं के अनुसार पोर्ट को कॉन्फ़िगर करने की अनुमति प्रदान करता है।
  • सीपीयू, फ्लैश मेमोरी, रैम, नॉन-वोलेटाइल रैम, कंसोल, नेटवर्क इंटरफेस कार्ड राउटर के मुख्य कॉम्पोनेन्ट हैं।
  • Internet service providers, ई-मेल, वेब पेज, इमेज, आवाज या वीडियो फ़ाइल के रूप में डेटा को स्रोत से गंतव्य तक भेजने के लिए व्यापक रूप से राउटर का उपयोग करते हैं। 
  • यह आईपी पते की मदद से पूरी दुनिया में कही भी डेटा भेज सकता है।

Conclusion 

दोस्तों आज के इस आर्टिल्स में हमने Router के बारे में बात की और जाना कि राउटर क्या है? (What is Router In Hindi)  राउटर कैसे काम करता है? (How Router Works In Hindi) राउटर कितने प्रकार के होते है? (Types of Router In Hindi) और राउटर के क्या फायदे व क्या नुकसान है? 

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तो दोस्तों आशा करता हूँ कि आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा और यदि ये आर्टिकल आपको पसंद आया है तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों को शेयर करना न भूलिएगा ताकि उनको भी Router Kya Hai के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके .

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