Analog Computer क्या है? [Analog Computer In Hindi]

कंप्यूटर को उसके कार्यों के अनुसार कईं प्रकारों में बांटा जा सकता है, इनमें से एक प्रकार का नाम है Analog Computer.

मगर यह Analog Computer Kya Hai? यह किस काम आता है? और इसकी विशेषताएं क्या है?

यदि आपके मन में यह सब सवाल आ रहे है तो आप बिल्कुल सही जगह पर है क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हम Analog Computer के बारे में बात करने वाले है |

आज हम विस्तार से जानेंगे कि एनालॉग कंप्यूटर क्या है? (What is Analog Computer In Hindi) एनालॉग कम्प्यूटर्स कितने प्रकार के होते है? (Types of Analog Computer In Hindi) और एनालॉग कम्प्यूटर्स उपयोग करने के क्या फायदे है और क्या नुकसान है? (Advantages and Disadvantages of Analog Computer In Hindi)

तो आइये अब बिना समय गवाए सबसे पहले जानते है कि Analog Computer Kya Hai?

Analog Computer In Hindi

एनालॉग कंप्यूटर क्या है? (What is Analog Computer In Hindi)

इलेक्ट्रानिक्स में मुख्य रूप से 2 प्रकार के signals होते है Analog signal और Digital signal |

Analog signal वह सिग्नल होते है जो की एक Continuous wave की तरह होती है, यानि की ऐसी तरंग जिनका आयाम (amplitude) और आवृत्ति (frequency) constant रहती है |

इन Analog signals को समझने और उन पर काम करने के लिए हमें कंप्युटरस की जरूरत पड़ती है, 

तो जिन कंप्युटरस की मदद से हम Analog सिग्नलस को समझ सके और उन पर काम कर सके, उन कंप्युटरस को Analog कंप्युटर कहा जाता है |

जैसे की आपने किसी vehicle की स्पीड को मापने वाला मीटर देखा होगा, जिसमें स्पीड की कुछ वैल्यूस लिखी होती है और एक पॉइन्टर होता है जो की आपको vehicle की स्पीड बताता है, इस मीटर को speedometer कहा जाता है, यह एक Analog Computer होता है,

ऐसे ही voltmeter, वजन जाँचने वाली मशीन, आपकी घड़ी जिसमें कांटे लगे होते है, वह भी Analog Computer है।

Analog Computers भौतिक मात्राओ (जैसे की लंबाई, ऊंचाई, प्रेशर, तापमान इत्यादि) को मापते है, और इन सब को मापने के बाद यह हमें अंकों के रूप में उनके बारे में जानकारी प्रदान करते है।

आज कल इन सब को मापने के लिए भी डिजिटल डिवाइस आने लगे है, डिजिटल डिवाइसेस आज के दौर में analog devices की जगह लेते जा रहे है,

लेकिन आज भी ऐसे बहुत से क्षेत्र है जहां डिजिटल डिवाइसेस पूरी तरह से analog डिवाइसेस की जगह नहीं ले पाए है, क्यूंकी अभी भी ऐसी बहुत सि कंडिशन्स है, जिनमें डिजिटल डिवाइसेस analog devices का मुकाबला नहीं कर सकते।

एनालॉग कंप्यूटर के उदाहरण (Examples of Analog Computer In Hindi)

वैसे तो Analog Computer को अब वैज्ञानिक और इंजीनियरस ही इस्तेमाल करते है और रोजाना ज़िंदगी में इन कंप्युटरस की जगह डिजिटल कम्प्यूटर्स ने ले ली है, लेकिन अभी भी इन कम्प्यूटर्स को बहुत जगहों पर प्रयोग किया जाता है, कुछ एनालॉग कम्प्यूटर्स को तो आप अपनी रोजाना ज़िंदगी में भी प्रयोग होता हुआ देख सकते है-:

1) Speedometer -:

हम आपको ऊपर भी इसके बारे में बता चुके है, हमारी bikes, cars या फिर कोई भी दूसरा vehicle, उनमें vehicle की स्पीड को मापने के लिए एक मीटर दिया होता है, वह Analog Computers होते है,

वैसे कुछ नए vehicles में डिजिटल speedometer भी आने लगे है, लेकिन अभी भी अधिकतर vehicles में आपको यह एनालॉग कम्प्यूटर्स वाले speedometer ही देखने को मिलेंगे।

2) Analog Clock -: 

Analog Clocks उन घड़ियों को कहा जाता है, जो की सुइयों की मदद से समय बताती है, वैसे इन सुइयों को हम पॉइन्टर कह सकते है लेकिन इंग्लिश भाषा में इन सुइयों को hands कहा जाता है |

analog clock

आपने यह घड़ियाँ जरूर देखी होगी, इन घड़ियों को दीवार पर लगाने के लिए बनाया जाता है, यह घड़ियाँ छोटे रूप में भी आती है जिन्हे कलाई पर पहना जाता है उन कलाई पर पहनी जाने वाली घड़ियों को wristwatch कहा जाता है | 

3) Seismometer -: 

Seismometer यह डिवाइस भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए प्रयोग किया जाता है | 

यह डिवाइस धरती के करीब रखा जाता है और फिर जैसे ही भूकंप के कारण से या फिर ज्वालामुखी के फटने से या फिर किसी ओर धमाके की वजह से धरती हिलती है तो यह डिवाइस धरती की हिलने की वजह से हो रहे कंपन को रिकार्ड करता है और फिर उसे अंकों के रूप में हमारे सामने लाता है, यह डिवाइस भी एक एनालॉग कम्प्यूटर होता है।

4) Tide Predictors -:

Tide Predictors यह डिवाइस समुन्द्र में उठने वाले tides यानि की ज्वार को मापने के लिए प्रयोग किए जाते है, जैसा की आप जानते ही होंगे कि समुन्द्र में ज्वार धरती, सूर्य और चाँद के बीच होने वाले गुरुत्वीय खिंचाव की वजह से होता है,

तो यह डिवाइस सूर्य और चाँद की position से अंदाजा लगाते है कि आने वाले ज्वार कितने बड़े होंगे और फिर यह गणना करने के बाद हमें जानकारी प्रदान करते है।

5) Thermometer -: 

Thermometer एक ऐसा डिवाइस होता है जो की तापमान को मापने के काम आता है, आज के समय में thermometers भी डिजिटल हो चुके है, लेकिन इसके बावजूद बहुत जगह पर अब भी mercury thermometers प्रयोग किए जाते है और यह mercury thermometers भी एक एनालॉग कम्प्यूटर होते है।

एनालॉग कंप्युटर के प्रकार (Types of Analog Computer In Hindi)

Analog Computers के कईं प्रकार होते है, लेकिन इनपुट के आधार पर एनालॉग कंप्युटर को मुख्य रूप से 2 प्रकारों में बांटा जा सकता है -:

  1. Electronic Analog Computers
  2. Mechanical Analog Computers

1) Electronic Analog Computers -:

यह वह Analog Computers होते है जो की इनपुट के रूप में इलेक्ट्रिक सिग्नलस को लेते है और फिर हमें आउट्पुट देते है,

इनपुट उस डाटा को कहा जाता है जो की डिवाइस के अंदर enter करता है और आउट्पुट उस डाटा या जानकारी को कहा जाता है जो की हमें इनपुट enter करने पर मिलती है,

आप Voltmeter के उदाहरण से इसे समझ सकते हो, Voltmeter के अंदर सबसे पहले इनपुट के तौर पर electricity जाती है, जो की एक इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल होता है और उसके बाद voltmeter हमें यह जानकारी देता है कि जो इलेक्ट्रिसिटी आ रही है उसकी voltage कितनी है,

तो voltmeter में इनपुट के तौर पर इलेक्ट्रिसिटी गई और हमें जानकारी के रूप में यह पता चला कि उस इलेक्ट्रिसिटी की वोल्टेज कितनी है तो इसमें वोल्टेज हमारी आउट्पुट होगी,

तो आपने अभी अभी जाना की voltmeter एक इलेक्ट्रिक सिग्नल को इनपुट के तौर पर लेता है और हमें कोई आउट्पुट देता है, तो ऐसे में हम कह सकते है कि voltmeter एक Electronic Analog Computer है,

ऐसे ही जो ऐनलॉग कंप्युटरस इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलस को इनपुट के तौर पर ले कर हमें कोई आउट्पुट देते है, उन ऐनलॉग कंप्युटरस को इलेक्ट्रॉनिक ऐनलॉग कंप्युटरस कहा जाता है।

2) Mechanical Analog Computers -: 

यह वह Analog Computers होते है जो की इनपुट के रूप में कोई मकैनिकल quantity का इस्तेमाल करते है और उसके बाद हमें कोई आउट्पुट देते है,

Mechanical Analog Computers  को अच्छे से समझने के लिए हम इसमें speedometer का उदाहरण ले लेते है.

Speedometer वह डिवाइस होता है जो की हमें vehicle की स्पीड के बारे में जानकारी देता है.

Speedometer सबसे पहले गाड़ी के पहियों के घूमने की तेजी का अनुमान लगाता है जिसके अनुसार वह यह अनुमान लगाता है कि vehicle कितने समय में कितनी दूरी तय कर रहा है.

और फिर इन सब बातों का अनुमान लगा कर उसे जो जानकारी मिलती है, उन जानकारियों के आधार पर calculations करने के बाद वह हमें vehicle की स्पीड बताता है।

इस उदाहरण में जैसा हमनें बताया की speedometer vehicle की स्पीड को बताने के लिए इनपुट के रूप में जो जानकारी लेता है, वह है कि vehicle का पहियाँ कितनी तेजी से घूम रहा है,

जो की एक Mechanical quantity है और इस जानकारी के बाद वह हमें आउट्पुट के रूप में यह बताता है कि vehicle की स्पीड कितनी है,

तो इनपुट के तौर पर एक मकैनिकल quantity का प्रयोग करना और उसके बाद हमें आउट्पुट देना, speedometer के कार्य करने के इस तरीके के कारण हम कह सकते है की speedometer एक Mechanical Analog Computer है.

और ऐसे ही कोई भी ऐनलॉग कंप्युटर जो की Mechanical quantity को इनपुट के तौर पर लेकर हमें आउट्पुट देता है, उस ऐनलॉग कंप्युटर को Mechanical Analog Computer कहा जाता है।

एनालॉग कंप्युटर के फायदे (Advantages of Analog Computer In Hindi)

आज के समय में हर जगह डिजिटल कंप्युटर को प्रयोग होने लगा है, डिजिटल कंप्युटर हमें बहुत सी सुविधाएँ प्रदान करते है, लेकिन उसके बावजूद आज भी बहुत जगहों पर डिजिटल की जगह Analog Computers प्रयोग होते है,

तो ऐसा क्यूँ किया जाता है, Analog Computers को प्रयोग करने से हमें क्या फायदे मिलते है चलिए जानते है -:

  • एनालॉग कंप्युटर की स्पीड अधिक होती है, यह हमें जल्दी से रिजल्ट दे सकता है,
  • एनालॉग कंप्युटर वास्तविक समय (Real Time) में काम करते है, उन्हे डिजिटल कंप्युटरस की तरह सिग्नल को डिजिटाइज़ नहीं करना पड़ता,
  • Analog Computers में transducers की जरूरत नहीं पड़ती, transducer वह डिवाइस होते है जो की एनर्जी को इस तरह के सिग्नल में बदल देते है, जिनको कंप्युटरस के माध्यम से समझा जा सके,
  • Analog Computers कईं जगहों पर एक साथ कईं equations को solve करने की क्षमता रखते है,
  • Analog कंप्युटर को सेटअप करने के लिए यूजर को इसकी डाइनैमिक रेंज को स्केल करना होता है, डाइनैमिक रेंज इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में सबसे अधिक और सबसे कम सिग्नल के ratio को कहा जाता है, डाइनैमिक रेंज को स्केल करने के वजह से यूजर को सिस्टम की अच्छी जानकारी मिल जाती है, जिस से प्रॉब्लेम्स को दूर करना आसान रहता है।

एनालॉग कम्प्यूटर के नुकसान (Disadvantages of Analog Computer In Hindi)

कोई भी चीज जिसके फायदे होते है, उसका कोई ना कोई नुकसान भी जरूर होता है, ऐसे ही Analog Computers के भी नुकसान है, जिसकी वजह से आज के समय में जिन जगहों पर भी संभव था वहाँ पर Analog Computers की जगह दूसरे कंप्युटरस को प्रयोग किया जाने लगा है, 

तो क्या है Analog Computers के नुकसान आइए जानते है -:

  • इनकी स्पीड अधिक होती है, लेकिन जितना फायदा हमें यह स्पीड में देता है उसका भुगतान हमें accuracyमें करना पड़ता है, इसकी accuracy डिजिटल कंप्युटरस की तुलना में कम होती है,
  • Analog Computers में हम डाइनैमिक रेंज को स्केल कर सकते है, लेकिन उसकी भी एक लिमिट होती है उस लिमिट तक पहुँचने के बाद हम इसकी डाइनैमिक रेंज को ओर स्केल नहीं कर पाते,
  • यह हमें real time में रिजल्ट देता है, जिसकी वजह से किसी specific टाइम पर रिजल्ट को रिकार्ड करना मुश्किल हो जाता है, जिसकी वजह से बाद में रिजल्ट को देख कर की जाने वाली analysis में दिक्कत आती है,
  • यदि डिजिटल कंप्युटरस को उसकी जरूरत के अनुसार sources दिए जाए, जैसे की पावर इत्यादि तो यह Analog Computers से बड़ी प्रॉब्लेम्स को सुलझा सकता है।

निष्कर्ष

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमनें Analog Computers के बारे में बात की और जाना कि Analog Computers एनालॉग डेटा पर कार्य करते है और हम कह सकते है कि Analog Computers वह कम्प्यूटर्स है जहां से टेक्नॉलजी की शुरुआत हुई |

दोस्तों आशा करता हु कि आज के इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको एनालॉग कंप्यूटर क्या है? (What is Analog Computer In Hindi) एनालॉग कम्प्यूटर्स कितने प्रकार के होते है? (Types of Analog Computer In Hindi) और एनालॉग कम्प्यूटर्स उपयोग करने के क्या फायदे है और क्या नुकसान है? (Advantages and Disadvantages of Analog Computer In Hindi) से संबंधित सभी जानकारी मिल गई होगी |

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अगर आपको अभी भी Analog Computer in Hindi से संबंधित कोई भी प्रश्न या Doubt है तो आप कमेंट्स के जरिए हमसे पुछ सकते है। मैं आपके सभी सवालों का जवाब दूँगा और ज्यादा जानकारी के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते है |

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Jeetu Sahu is A Web Developer | Computer Engineer | Passionate about Coding, Competitive Programming and Blogging

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